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प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन कृषि बाजार को हरी झंडी दिखाई, विशेषज्ञों ने नाउम्मीदी जताई

चारू कार्तिकेय | Updated on: 15 April 2016, 8:26 IST

हाल ही में किसानों के लिए फसल बीमा योजना शुरू करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को किसानों से जुड़ी एक नई योजना लांच की है. उन्होंने राष्ट्रीय कृषि ई-मार्केट योजना की शुरुआत की. किसान इस योजना का आकलन कुछ दिन बाद इसका इस्तेमाल करने के बाद ही कर सकेंगे, लेकिन कृषि विशेषज्ञ इसके बारे में एक अलग ही राय रखते हैं. उनका मानना है कि इस स्कीम से कोई बड़ा फायदा नहीं होने वाला है.

केन्द्रीय कृषि तथा किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह के अनुसार इस प्लेटफार्म का उद्देश्य कृषि बाजार में बेहद जरूरी और व्यापक सुधार करना है ताकि किसानों के उत्पादों की अच्छी कीमतें मिल सकें.

इस पायलट योजना के लिए आठ राज्यों की 21 मंडियों को चुना गया है

यह योजना 200 करोड़ रुपए के बजट के साथ मंजूर की गई और इसका लक्ष्य मार्च, 2018 तक कॉमन ई-मार्केट प्लेटफॉर्म से 585 नियामित बाजारों को जोड़ना हैं.

राधामोहन सिंह ने बताया कि इस पायलट योजना के लिए आठ राज्यों की 21 मंडियों को चुना गया है. इनमें बीजेपी शासित गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, झारखण्ड, तथा उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश तथा तेलंगाना शामिल हैं.लेकिन कृषि विशेषज्ञों को इसमें कुछ भी नया नहीं लगता है. कैच ने इस संबंध में तमाम कृषि विशेषज्ञों से बातचीत की.

फसलों की आवाजाही मुख्य समस्या

योजना आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर अभिजीत सेन के ममुताबिक इस योजना में कुछ भी नया नहीं है. उन्होंने बाताया कि इस तरह के प्रयास पहले भी कुछ समय के लिए किया जा चुका है.

सेन ने कहा कि आप इलेक्ट्रॉनिक्स का श्रेय तो ले सकते हैं, लेकिन असली समस्या मंडियों में फसलों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना है.

उनकी राय में एक राष्ट्रीय कृषि बाजार को तब तक स्थापित नहीं किया जा सकता था जब तक कि माल की आवाजाही के लिए राज्यों की सहमति प्राप्त न हो.

देश में पहले से ही ई-मार्केट हैं और वह कोई खास प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं: अशोक देसाई

प्रख्यात अर्थशास्त्री और केंद्रीय वित्तमंत्री के सलाहकार अशोक देसाई ने भी कहा कि वह इस स्कीम से कोई खासे प्रभावित नहीं है. उनके अनुसार यह कोई बहुत अच्छा रास्ता नहीं है. देश में पहले से ही ई-मार्केट हैं और वह कोई खास प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं. पता नहीं सरकार ने उनकी खामियों को समझने का कोई प्रयास किया है या नहीं.

कमोडिटी एक्सचेंज का हवाला देते हुए देसाई ने कहा कि इसमें कोई खास विस्तार नहीं हुआ है और कुछ ही कंपनियों को मुनाफा हो रहा है. उन्होंने आगे कहा कि सबसे पहले हमें एक अध्ययन करना चाहिए कि कहां गलती हुई है और लंबे समय से क्यों ये एक अविकसित बाजार बना हुआ है.

राज्यों के बीच विश्व व्यापार संगठन जैसे रिश्ते होंगे?

सिकंदराबाद बेस्ड सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर मार्केट केंद्र के कार्यकारी निदेशक डॉ जीवी रमनजेनुलू की राय है कि इस योजना से खरीदार बाजार के रुप में भारत का कृषि बाजार मजबूत होगा. इसमें व्यापारियों को लाभ होगा. उन्होंने कैच को बताया कि यदि ई-बाजार एक अंतर-राज्य के आधार पर काम करेगा तो यह राज्यों के बीच संबंधों के विकास में वहीं अहम भूमिका निभाएगा जो दुनिया भर में व्यापार करने के लिए विश्व व्यापार संगठन निभाता है.

डॉ जीवी रमनजेनुलू ने समझाया कि देश भर में खेती की लागत भिन्न-भिन्न है. इसके लागू होने के बाद व्यापारी उन स्थानों से खरीदना ज्यादा पसंद करेंगे जहां पर कम लागत होगी.

First published: 15 April 2016, 8:26 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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