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तीन महीने में बदले सरकार के सुर, एसयूयूटीआई की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी

अभिषेक पराशर | Updated on: 8 July 2016, 15:37 IST
QUICK PILL
  • एसयूयूटीआई की वेबसाइट पर जारी अधिसूचना में सरकार ने तीन सालों के दौरान एसयूयूटीआई की हिस्सेदारी वाली कंपनियों की शेयरहोल्डिंग बेचने के लिए तीन मर्चेंट बैंकरों को नियुक्त करने की निविदा मांगी है.
  • करीब तीन महीने पहले ही सरकार ने कहा था कि वह इन कंपनियों में मौजूद अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए बेताब नहीं है. 
  • एसयूयूटीआई की सूचीबद्ध और गैर सूचीबद्ध समेत 51 कंपनियों में हिस्सेदारी है. कंपनी की ऐक्सिस बैंक में 11.72 फीसदी जबकि आईटीसी में 11.27 फीसदी हिस्सेदारी है.

मोदी सरकार विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए कई सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में मौजूद अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला कर चुकी है. एसयूयूटीआई (यूटीआई की विशेष अंडरटेकिंग) के जरिये सरकार इन सभी कंपनियों में मामूली हिस्सेदारी रखती है.

करीब तीन महीने पहले ही सरकार ने कहा था कि वह इन कंपनियों में मौजूद अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए बेताब नहीं है. आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा था, 'हम हड़बड़ी में नहीं हैं. हमें इसकी कोई जरूरत नहीं है.' 

इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं कि सरकार संसाधन जुटाने के लिए इन कंपनियों में मौजूद अपनी हिस्सेदारी को बेच सकती है. एसयूयूटीआई का गठन 2003 में किया गया था. यह पूर्ववर्ती कंपनी यूटीआई की सहायक कंपनी है.

करीब तीन महीने पहले सरकार ने कहा था कि वह एसयूयूटीआईर् की हिस्सेदारी बेचने के लिए बेताब नहीं है

एसयूयूटीआई की सूचीबद्ध और गैर सूचीबद्ध समेत 51 कंपनियों में हिस्सेदारी है. कंपनी की ऐक्सिस बैंक में 11.72 फीसदी जबकि आईटीसी में 11.27 फीसदी हिस्सेदारी है. वहीं लार्सन एंड टुब्रो में कंपनी की 8.18 फीसदी हिस्सेदारी है. मार्च 2014 में सरकार ने ऐक्सिस बैंक की 9 फीसदी हिस्सेदारी करीब 5,500 करोड़ रुपये में बेच दी थी. 

इसके अलावा कंपनी आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, टाटा मोटर्स लिमिटेड और सन फॉर्मास्यूटिकल्स लिमिटेड में हिस्सेदारी रखती है.

एसयूयूटीआई की वेबसाइट पर जारी अधिसूचना में सरकार ने तीन सालों के दौरान एसयूयूटीआई की हिस्सेदारी वाली कंपनियों की शेयरहोल्डिंग बेचने के लिए तीन मर्चेंट बैंकरों को नियुक्त करने की निविदा मांगी है.

विनिवेश लक्ष्य पर नजर

सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष 2016-17  में विनिवेश के जरिये 56,500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है. 

कुल रकम 56,500 करोड़ रुपये में से 36,000 करोड़ रुपये की रकम पब्लिक एंटरप्राइजेज में मौजूद सरकार की अल्पांश हिस्सेदारी को बेचकर जुटाई जानी है जबकि बाकी की 20,500 करोड़ रुपये की रकम मुनाफा और घाटा उठा रही पीएसयू की हिस्सेदारी को बेचकर जुटाई जानी है.

मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार की योजना ओएनजीसी, ऑयल इंडिया, एनएमडीस, कोल इंडिया, एनटीपीसी और एमएमटीसी जैसी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने की है. 

First published: 8 July 2016, 15:37 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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