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मोदी सरकार के चार साल में बैंकों के लोन राइट ऑफ़ करने में हुई 161 फीसदी की बढ़ोतरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 August 2018, 17:08 IST

पिछले चार वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) द्वारा बट्टे खाते में डाली गई राशि दोगुनी हो गई. संसद के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में पीएसयू बैंकों ने 49,018 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले. जो वित्तीय वर्ष 2017-18 में 161% बढ़कर 1,28,229 करोड़ रुपये हो गया. वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने राज्यसभा में इसकी जानकारी दी.

भारत के सबसे बड़े ऋणदाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने वित्त वर्ष 17-18 में 39,151 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक (12,515 करोड़ रुपये) और बैंक ऑफ इंडिया (8,976 करोड़ रुपये) राइट ऑफ़ किये. आंकड़ों से पता चलता है कि कृषि क्षेत्र में वित्त वर्ष 2016-17 में 7,091 करोड़ राइट ऑफ़ किये गए.

 

हाल के वर्षों के दौरान बट्टे खाते में डाली गई रकम पिछले वर्षों के इस तरह के तनावग्रस्त ऋण खातों के कारण काफी हद तक हैं. एनपीए को लेकर बनाई गई उच्च स्तरीय समिति ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के लिए एक पारदर्शी बाजार-आधारित समाधान का सुझाव दिया है. पंजाब नेशनल बैंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष सुनील मेहता की अध्यक्षता वाली समिति ने सोमवार यह रिपोर्ट वित्त मंत्री के सामने पेश की. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सिफारिशें आरबीआई के नियमों के साथ पूरी तरह से अनुपालन कर रही हैं और 'बैंड बैंक' बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में पांच सूत्री रणनीति का सुझाव दिया है. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समिति की रिपोर्ट में एसेट रिकंस्ट्रशन के लिए सशक्त बनाने को कहा गया है. इसके तहत 500 करोड़ रुपये से छोटे एनपीए को निपटाने की सिफारिश की गई है और 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के एनपीए की नीलामी होगी.

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First published: 8 August 2018, 17:08 IST
 
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