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पीएनबी की विलफुल डिफॉल्टर्स सूची अब आने का कोई मतलब नहीं है

अभिषेक पराशर | Updated on: 16 June 2016, 12:55 IST
QUICK PILL
  • पंजाब नेशनल बैंक ने 913 विलफुल डिफॉल्टर्स की सूची को सार्वजनिक कर दिया है. बैंक ने मार्च 2016 के आखिर तक कर्ज नहीं चुकाने वाले की सूची सामने रखी है. इन डिफॉल्टर्स के पास बैंक  का 11 हजार 4 करोड़ रुपये का कर्ज है. 
  • विनसम डायमंड पर बैंक का 900 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि फॉरएवर प्रीसियस ज्वैलरी एंड डायमंड पर 747 करोड़ रुपये का कर्ज है. 
  • विशेषज्ञों के मुताबिक पीएनबी को विलफुल डिफॉल्टर्स की सूची को पहले जारी कर देना चाहिए था ताकि समय रहते डिफॉल्टर्स के खिलाफ कार्रवाई हो पाती. सूची में शामिल विजय माल्या देश  छोड़कर भाग चुके हैं वहीं जतिन मेहता ने वैसे देश की नागरिकता ले रखी है, जिसके साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है.

विलफुल डिफॉल्टर्स की वजह से बैंकों के बढ़ते एनपीए को लेकर जब सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व बैंक से उन लोगों की सूची जारी करने के लिए कहा था, तब आरबीआई ने अपनी लाचारगी जाहिर करते हुए कोर्ट को बताया था, 'बैंक डिफॉल्टर्स की लंबी लिस्ट को सार्वजनिक नहीं कर सकते क्योंकि इससे पूरी अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी. इससे बाजार और आम आदमी का भरोसा उठ जाएगा.' 

आरबीआई की इस आशंका को दरकिनार करते हुए पंजाब नेशनल बैंक ने 913 विलफुल डिफॉल्टर्स की सूची को सार्वजनिक कर दिया है. लेकिन विशेषज्ञों की माने तो अब इस सूची को सार्वजनिक करने का कोई मतलब नहीं है. यह कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति है.

बैंक ने मार्च 2016 के आखिर तक कर्ज नहीं चुकाने वाले की सूची सामने रखी है. इन डिफॉल्टर्स के पास बैंक का 11 हजार 4 करोड़ रुपये का कर्ज है. 

सूची के मुताबिक विनसम डायमंड पर बैंक का 900 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि फॉरएवर प्रीसियस ज्वैलरी एंड डायमंड पर 747 करोड़ रुपये का कर्ज है. 

बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस पर बैंक का 597 करोड़ रुपये जबकि जूूम डिवेलपर्स पर 410 करोड़ रुपये बकाया है. सूची में चौंकाने वाला नाम को-ऑपरेटिव क्षेत्र की संस्था नेफेड का भी नाम शामिल है जिस पर बैंक का 224 करोड़  रुपये बकाया है. इंदौर की रियल एस्टेट कंपनी जूम डिवेलपर्स देश के पांच बड़े डिफॉल्टर्स में से एक है, जिस पर बैंकों का 1,647 करोड़ रुपये बकाया है.

विनसम डायमंड्स के प्रमोटर जतिन मेहता और उनकी पत्नी सोनिया 2013-14 में भारत की नागरिकता छोड़ चुके हैं. मेहता और उनकी पत्नी अब सेंट किट्स एंड नेविस के नागरिक हो गए हैं. सेंट किट्स को कर चोरों और काला धन रखने वालों के लिए सुरक्षित पनाहगाह माना जाता है.

विनसम डायमंड्स देश की दूसरी बड़ी डिफॉल्टर कंपनी है. कंपनी ने पीएनबी के अलावा अन्य बैंक मसलन स्टैंडर्ड चार्टर्ड की अगुवाई वाले बैंक समूह का करीब 4,680 करोड़़ रुपये बकाया है. विनसम और उसकी सहयोगी कंपनी पर बैंकों का कुल 6,700 करोड़ रुपये बकाया है.

पीएनबी समेत अन्य 17 बैंकों का कर्ज लेकर शराब कारोबारी विजय माल्या लंदन भाग चुके हैं

सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और केंद्र सरकार दोनों को फटकार लगाते हुए पूछा था कि जिन कारोबारियों ने बैंकों का पैसा दबा रखा है, उनके खिलाफ अब क्या कार्रवाई की गई है? केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक कोर्ट के इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई.

पंजाब नेशनल बैंक के एक अधिकारी बताते हैं, 'विलफुल डिफॉल्टर्स की सूची को बहुत पहले जारी कर देना चाहिए था ताकि समय रहते उन कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई हो पाती. बैंक तब डिफॉल्टर्स से अपनी शर्तों पर कर्जों की वसूली कर सकते थे.'

जाहिर तौर पर पंजाब नेशनल बैंक की इस सूची में वैसा कुछ भी नया नहीं है, जिसके बारे में अभी तक लोगों को जानकारी नहीं थी. जतिन मेहता देश की नागरिकता छोड़ चुके हैं और उन्होंने जिस देश की नागरिकता ली है, उसका भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं है. 

अधिकारी ने कहा, 'जतिन मेहता से कर्ज वसूलना तो दूर, उन्हें देश वापस लाना भी मुश्किल है.'

पीएनबी समेत अन्य 17 बैंकों का कर्ज लेकर शराब कारोबारी विजय माल्या लंदन भाग चुके हैं. राज्यसभा सांसद विजय माल्या को भगोड़ा घोषित करने में सरकार को करीब तीन महीने लग गए. माल्या पर पीएनबी का 597 करोड़ रुपये बकाया है. अन्य बैंकों का कर्ज अगर इसमें मिला दिया जाए तो यह रकम करीब 9,000 करोड़ रुपये बैठती है.

अधिकारी बताते हैं, 'माल्या के देश में रहते अगर पीएनबी यह सूची जारी कर देती तो आज स्थिति दूसरी होती. माल्या को कर्ज का भुगतान करने के लिए बैंक दबाव बना सकता था. लेकिन अब वह देश में नहीं है. भारत वापस लाए बगैर माल्या से कर्ज वसूली के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता.'

पंजाब नेशनल बैंक  समेत देश के 17 बैंकों का करीब 9,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर चंपत हो चुके शराब कारोबारी विजय माल्या को विशेष अदालत अब भगोड़ा घोषित कर चुकी है.

दबाव में पीएनबी

सख्त कानून और बैंकों की लापरवाही की वजह से विलफुल डिफॉल्टर्स से कर्ज की वसूली नहीं की जा सकी. नेताओं और डिफॉल्टर्स के बीच गठजोड़ की वजह से अक्सर बैंक एनपीए को सिबिल आंकड़ों में नहीं दिखाते हैं और साथ ही उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई से भी हिचकते हैं.

विनसम डायमंड्स के प्रमोटर जतिन मेहता प्रधानमंत्री मोदी के बेहद करीबी माने जाने वाले गौतम अडानी के संबंधी हैं. मेहता के बेटे सूरज की शादी कृपा से हुई हैं जो गौतम अडानी के भाई विनोद शांतिलाल अडानी की बेटी हैं.

विलफुल डिफॉल्टर्स ने सबसे अधिक सरकारी बैंकों का पैसा रखा है. सिबिल के आंकड़ों के मुताबिक 2002-15 के बीच विलफुल डिफॉल्टर्स की तरफ से नहीं चुकाई जाने वाली रकम में करीब 900 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और इसमें सबसे अधिक हिस्सेदारी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की है.

31  मार्च 2016 को समाप्त तिमाही में पंजाब नेशनल बैंक को रिकॉर्ड 5,367 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. यह अब तक किसी भारतीय बैंक को हुआ सबसे बड़ा घाटा है. घाटा कितना बड़ा था, इसका अनुमान बैंक के दो पूर्र्व सीएमडी के उस बयान से लगाया जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था, 'बैंक को हुआ घाटा उनकी कल्पना से परे है.'

पीएनबी को हुए बड़े घाटे की वजह एनपीए की प्रॉविजनिंग थी. पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक को 308.56 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था.

सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में बैंकों में 25,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने की योजना बनाई है

उम्मीद से अधिक बुरे प्रदर्शन के बाद ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनी सीएलएसए और क्रेडिट सुइस ने पीएनबी की रेटिंग में कटौती कर दी थी. 

बढ़ते एनपीए की वजह से बैंकों को नकद संकट का सामना करना पड़ रहा है. जिसका सीधा असर इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी परियोजनाओं की फंडिंग पर पड़ा है. 

परियोजनाओं की फंडिंग को चालू रखने के लिए सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में बैंकों में 25,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने की योजना बनाई है जिसमें से 5,050 करोड़ रुपये की पूंजी बैंकों को दिए जाने के लिए सरकार मंजूरी दे चुकी है.

40 सूचीबद्ध बैंकों का एनपीए मार्च 2016 में 5.8 ट्रिलियन रुपये रहा. दिसंबर के अंत में यह रकम 4.38 ट्रिलियन रुपये थी. आने वाले दिनों में इस रकम के कम होने की संभावना नहीं के बराबर है. बैंकों की माने तो चालू वित्त वर्ष के दौरान इस रकम में बढ़ोतरी ही होगी. सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए निश्चित तौर पर यह सही संकेत नहीं है.

First published: 16 June 2016, 12:55 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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