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नोटबंदी पर सवाल: मोदी सरकार के कैशलेश इकोनॉमी वाले नारे का क्या हुआ ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 March 2018, 13:34 IST

करेंसी सर्कुलेशन का स्तर एक बार फिर से नोटबंदी से पहले वाली स्थिति में पहुंच चुका है. नोटबंदी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार हमेशा यही तारक देती रही की इससे हम कैशलेस इकॉनमी की तरफ बढ़ेंगे और कालेधन पर लगाम लगेगी.

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, 23 फरवरी को कुल 17.82 लाख करोड़ रुपये की करेंसी सर्कुलेशन में थी, जो नवंबर लागू की गई नोटबंदी से पहले 17.97 लाख करोड़ थी.

 

वर्तमान सर्कुलेशन नोटबंदी से पहले का 99.17% है. एक रिपोर्ट के अनुसार शीर्ष स्तरीय सूत्रों का कहना है कि बड़ी नकदी लेनदेन पर सरकार की रोक ने सोने की तस्करी में बढ़ोतरी की है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कैशलेस को बढ़ावा देने के बाद भी लोग डिजिटल भुगतान करने में दिलचस्पी क्यों नहीं दिखा रहे हैं. अर्थशास्त्री इसका एक कारण  यह भी बताते हैं कि डिजिटल लेनदेन करने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं जैसे स्मार्टफोन, इंटरनेट कनेक्टिविटी और पीओएस मशीन की कमी भी इसका एक कारण है.

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इसके अलावा लोगों को डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहित नहीं करना और डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने के लोगों को मजबूर करना इसका कारण है.

First published: 6 March 2018, 13:03 IST
 
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