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तेजस एक्सप्रेस के किराए पर उठे सवाल, कर रही है रेलवे अधिनियम का उल्लंघन ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 October 2019, 12:00 IST

रेलवे के शीर्ष अधिकारियों मानना है कि देश की पहली निजी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस ने रेलवे अधिनियम 1989 का उल्लंघन कर रही है क्योंकि केंद्र सरकार टैरिफ पर निर्णय लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी है, न कि आईआरसीटीसी. द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार बहुप्रचारित तेजस एक्सप्रेस, जिसे 4 अक्टूबर को लखनऊ-दिल्ली-लखनऊ कॉरिडोर पर हरी झंडी दिखाई गई थी, का किराया शताब्दी और अन्य ट्रेनों की तुलना में अधिक है. भारतीय रेलवे ने आईआरसीटीसी को अपनी वाणिज्यिक पर्यटन और खानपान की जिम्मेदारी सौंपी थी.

दिल्ली-लखनऊ निजी ट्रेन संख्या 82502, IRCTC तेजस एक्सप्रेस 511 किलोमीटर की दूरी तय करने में 6 घंटे 30 मिनट लेती है जबकि यह गाजियाबाद (दो मिनट) और कानपुर सेंट्रल (पांच मिनट) स्टॉप पर रूकती है. ट्रेन में एसी एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए किराया 2,450 रुपये और जीएसटी और खानपान सहित एसी चेयर कार के लिए 1,565 रुपये है.

दूसरी ओर ट्रेन संख्या 12004 दिल्ली-लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस पांच स्टॉप - गाजियाबाद, अलीगढ़, टूंडला, इटावा (दो मिनट प्रत्येक) और कानपुर सेंट्रल (पांच मिनट). रूकती है. यह ट्रेन AC एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए 1855 और GST, सुपर फास्ट और आरक्षण शुल्क सहित AC चेयर कार के लिए 1,165 रु का किराया लेती है. इसी सेक्टर पर सुहेलदेव सुपर फास्ट एक्सप्रेस और गरीब रथ एक्सप्रेस एसी चेयर कार का किराया 645 रुपये और 480 रुपये है. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आईआरसीटीसी को टैरिफ तय करने का अधिकार नहीं है.


कहा गया है कि रेलवे अधिनियम की धारा 30 (1) जो दरों को ठीक करने की शक्ति देती है, कहती है "केंद्र सरकार समय-समय पर सामान्य या विशेष आदेश तय करके, यात्रियों और सामानों की ढुलाई के लिए दरें तय कर सकती है. रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार रेलवे अधिनियम ने स्पष्ट रूप से निर्धारित किया था कि यात्रियों और माल की ढुलाई के लिए दरें केंद्र सरकार द्वारा तय की जाएंगी.

हालांकि अधिनियम एक निजी तौर पर संचालित रेलवे को मान्यता नहीं देता है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा दरें तय की जानी हैं. ऑनलाइन टिकटों की बिक्री पर अधिकारी ने कहा कि अपनी खुद की वेबसाइट के अलावा, IRCTC ने भी पेटीएम, Ixigo, PhonePe, मेक माई ट्रिप इत्यादि ऑनलाइन भागीदारों के माध्यम से टिकट उपलब्ध कराया है. 100% बिक्री ऑनलाइन नहीं हो सकती है. अधिनियम कहता है कि रेलवे स्टेशन पर एक काउंटर होना चाहिए जिसमें काम के घंटे प्रदर्शित हों."

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First published: 14 October 2019, 11:12 IST
 
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