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राफेल डील की कीमत पर रक्षा मंत्रालय के अफसर ने उठाये थे सवाल, फिर भी हुआ सौदा

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 September 2018, 10:15 IST

सितंबर 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और उनके फ्रांसीसी समकक्ष के बीचनई दिल्ली में 36 राफेल विमानों के सौदे के लगभग एक महीने पहले रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अनुबंध की मानक कीमत पर सवाल उठाये थे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार वह अधिकारी रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव और एकयूशन मैनेजर (एयर) के साथ साथ कॉन्ट्रैक्ट निगोशिएशन कमिटी (सीएनसी) का हिस्सा था. अधिकारी ने सौदे के बेंचमार्क मूल्य के साथ-साथ अपने रिकॉर्ड में भी आपत्तियां डाली थी.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इस अधिकारी की आपत्ति के कारण कैबिनेट को सौदे को मंजूरी देने में देरी हुई थी. हालांकि बाद में उनकी आपत्तियों को एक अन्य वरिष्ठ एमओडी अधिकारी, अधिग्रहण (अधिग्रहण) द्वारा खारिज कर दिया गया था. इसके बाद राफेल सौदे को मंजूरी दे दी गई थी.

रिपोर्ट के अनुसार राफेल सौदा की फ़ाइल के हिस्से को वर्तमान में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) अध्ययन कर रहा है. जिसे शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है. सूत्रों ने बताया कि सीएजी की रिपोर्ट में राफेल सौदे पर आपत्ति वाले नोट को संदर्भित किया जा सकता है और यह भी उल्लेख किया जा सकता है कि इन आपत्तियों को ख़ारिज करने को लेकर क्या जानकारी दी गई है.

इससे पहले राफेल सौदे में घोटाले के आरोपों को खारिज करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि राफेल ज्यादा कीमत पर खरीदे गए हैं या नहीं, इसका फैसला नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की जांच के बाद ही पता चल सकता है.

उन्होंने कहा आरोपों के बावजूद राफेल सौदे को रद्द नहीं किया जाएगा. जेटली ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, "राफेल सौदा साफ है और इसे रद्द करने का कोई सवाल नहीं है." उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा राफेल एयरक्राफ्ट कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार की बातचीत की तुलना में सस्ता है या नहीं इन सभी तथ्यों और आंकड़ों को सीएजी के समक्ष रखा जाएगा.

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First published: 27 September 2018, 10:12 IST
 
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