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रघुराम राजन के इस्तीफे से नहीं होगा भारत की साख पर असर: फिच

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2016, 15:42 IST
QUICK PILL
  • वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) गवर्नर के इस्तीफे के बाद भारत के आर्थिक  परिदृश्य पर पड़ने वाली किसी आशंका को सिरे से खारिज कर दिया है. फिच ने कहा कि किसी व्यक्ति से ज्यादा महत्व नीतियों का होता है और भारत की रेटिंग व्यक्ति विशेष से नहीं नीतियों से होगी.
  • फिच ने राजन के काम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने गवर्नर रहते हुए कई अहम फैसले लिए. एजेंसी का कहना है कि राजन के उत्तराधिकारी को एक मजबूत विरासत मिलेगा. एजेंसी ने कहा कि राजन महंगाई को नियंत्रित करने के साथ ही बैंकों के बचत खाते को सुधारने में सफल रहे.
  • राजन के इस्तीफे की एक वजह स्वामी की लगातार बयानबाजी को भी माना जा रहा है. स्वामी के अलावा राजन ने भी कुछ ऐसे बयान दिए थे, जिससे सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आपत्ति थी.

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) गवर्नर के इस्तीफे के बाद भारत के आर्थिक  परिदृश्य पर पड़ने वाली किसी आशंका को सिरे से खारिज कर दिया है. फिच ने कहा कि किसी व्यक्ति से ज्यादा महत्व नीतियों का होता है और भारत की रेटिंग व्यक्ति विशेष से नहीं नीतियों से होगी.

राजन के दूसरे कार्यकाल को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए खुद राजन ने कहा था कि वह अपने मौजूदा तीन साल के कार्यकाल के विस्तार के पक्ष में नहीं हैं. बतौर आरबीआई गवर्नर राजन का कार्यकाल 4 सितंबर को पूरा हो रहा है.

फिच ने राजन के काम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने गवर्नर रहते हुए कई अहम फैसले लिए. एजेंसी का कहना है कि राजन के उत्तराधिकारी को एक मजबूत विरासत मिलेगा. एजेंसी ने कहा कि राजन महंगाई को नियंत्रित करने के साथ ही बैंकों के बचत खाते को सुधारने में सफल रहे.

सोमवार को जारी बयान में एजेंसी ने कहा, 'जहां तक रेटिंग का सवाल है तो नीतियां व्यक्ति से ज्यादा अहम होती हैं. महंगाई और कमजोर बैंक खाते जैसी दोनों अहम समस्याओं को पहचाना जा चुका है और नीति निर्माता इसे ठीक करने की दिशा में काम कर रहे हैं.'

फिच ने कहा, 'संस्थागत प्रक्रिया में केवल गवर्नर शामिल नहीं होता. इसमें आरबीआई के अधिकारी और अन्य लोग भी शामिल होते हैं.' फिच ने स्थिर परिदृश्य के साथ भारत की रेटिंग बीबीबी माइनस रखी है.

राजन का इस्तीफा बना सियासी मुद्दा

राजन के इस्तीफे के बाद पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा था कि वह इस फैसले से बेहद निराश हैं, लेकिन उन्हें राजन का फैसला चौंकाने वाला नहीं लगा.

चिदंबरम ने कहा, 'जैसा मैंने कुछ समय पहले भी कहा था कि यह सरकार राजन के लिए ठीक नहीं है. भारत को इस फैसले से नुकसान होगा.'

चिदंबर के इस बयान के बाद सियासत शुरू हो गई थी. उनके बयान के बाद देश के कई बड़े कारोबारी और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों ने यह साफ किया कि राजन के जाने से देश की आर्थिक नीति और अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं होगा. 

उद्योगपतियों का कहना था कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत हैं और इस पर सिर्फ राजन के इस्तीफे से कोई असर नहीं होगा. 

जहां तक भारत की रेटिंग का सवाल है तो नीतियां व्यक्ति से ज्यादा अहम होती हैं: फिच

भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस के सीईओ विशाल सिक्का ने कहा, 'मैंने 2008 का संकट देखा है और राजन ने अपने कार्यकाल में जिस तरह से काम किया, वह बेहतरीन था.' उन्होंने कहा, 'अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत है. भारत मजबूत है और सब कुछ चलता रहेगा. उन्होंने वास्तव में बहुत अच्छा काम किया.'

स्वामी का निशाना बने राजन

बीजेपी की तरफ से राज्यसभा भेजे जाने के बाद सुब्रमण्यन स्वामी ने सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर रघुराम राजन को गवर्नर पद से हटाए जाने की मांग की थी. 

स्वामी इसके बाद भी रुके नहीं. उन्होंने इसके बाद लगातार बयान देकर राजन को निशाना बनाया. स्वामी के बयानबाजी को सरकार ने भी रोकने की कोशिश नहीं की. स्वामी ने राजन को विदेशी एजेंट तक बता डाला. 

राजन के इस्तीफे की एक वजह स्वामी की लगातार बयानबाजी को भी माना जा रहा है. स्वामी के अलावा राजन ने भी कुछ ऐसे बयान दिए थे, जिससे सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आपत्ति थी.

खबरों के मुताबिक आरएसएस को इस बात से आपत्ति थी कि राजन बार बार ऐसी प्रतिक्रिया देते हैं जिससे उनका संबंध नहीं होता है. संघ के पदाधिकारियों का कहना था कि गवर्नर बुद्धिजीवि की तरह बर्ताव नहीं कर सकता और इस लिहाज से उन्हें इस तरह की बयानबाजी से दूर रहना चाहिए था. 

केंद्र सरकार राजन का इस्तीफा स्वीकार कर चुकी है. हालांकि अभी तक सरकार ने अगले गवर्नर के नाम की घोषणा नहीं की है.

First published: 20 June 2016, 15:42 IST
 
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