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2017 में खत्म हो जाएगी 92 साल पुरानी रेल बजट की परंपरा

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 August 2016, 16:54 IST
(कैच न्यूज)

केंद्र सरकार ने रेलवे बजट को हर साल संसद में अलग से पेश करने की दशकों पुरानी प्रथा को खत्म करने का फैसला लिया है. अगले वित्त वर्ष से रेल बजट आम बजट के साथ ही पेश किया जाएगा. इसके साथ ही 92 साल से चली आ रही परंपरा को 2017 से खत्म कर दिया जाएगा. पहली बार रेल बजट 1924 में पेश किया गया था

रेल बजट को अलग पेश न करने व आम बजट का हिस्सा बनाने पर वित्त मंत्रालय भी राजी हो गया है. वित्त मंत्रालय ने सही फैसले पर पहुंचने के लिए पांच सदस्यों की टीम बनाई थी. टीम की रिपोर्ट पर ही अंतिम रूप से यह निर्णय लिया गया है. सुरेश प्रभु ने भी राज्यसभा में कहा था कि उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली से रेल बजट को खत्म करने को कहा है. प्रभु ने कहा था कि इससे आने वाले वक्त में देश को आर्थिक फायदा होगा.

रेलवे पर वित्त मंत्रालय की  रहेगी नजर

रेल बजट के आम बजट में विलय के बाद वित्त मंत्रालय ही रेलवे को उसी प्रकार पैसे जारी करेगा जिस प्रकार अन्य मंत्रालयों को पैसा जारी किया जाता है. रेलवे द्वारा किए जा रहे खर्चे और कमाई पर भी वित्त मंत्रालय की नजर रहेगी. रेल बजट का आम बजट में विलय होने की स्थिति में, संपूर्ण वित्तीय बोझ वित्त मंत्रालय को स्थानांतरित हो जाएगा.

सबसे पहले विवेक देवरॉय की अध्यक्षता में नीति आयोग की एक समिति ने रेल बजट को आम बजट के साथ विलय करने की सिफारिश की थी. इसके बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर रेलवे का अलग से एक बजट पेश करने की पुरानी व्यवस्था खत्म कर इसका आम बजट में विलय करने की पेशकश की थी.

रेल बजट का लंबा इतिहास

  • साल 1859 से पहले ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में बजट नाम की कोई भी चीज नहीं थी. उसी साल ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड केनिंग ने अपनी कार्यकारिणी में जेम्स विल्सन को बतौर वित्त सदस्य नियुक्त किया.
  • विल्सन की पहल पर 18 फरवरी 1860 को वायसराय की परिषद में पहली बार बजट पेश किया गया. इस बजट में रेलवे का लेखा-जोखा भी शामिल था. जेम्स विल्सन को ही भारत में बजट प्रणाली का जन्मदाता कहा जाता है.
  • रेल बजट का भी एक लंबा इतिहास है. अंग्रेजी राज के समय से ही रेल बजट को पेश करने की परम्परा शुरू हो गई थी.
  • भारतीय रेल बजट एक विशेष बजट है जो आम बजट से बिलकुल अलग है. सर्वप्रथम 10 सदस्यीय एकवर्थ समिति की अनुशंसा पर 1924 में इसे पेश किया गया था.
  • साल 1921 में ईस्ट इंडिया रेलवे कमेटी के चेयरमैन सर विलियम एक्वर्थ ने यह देखा कि पूरे रेलवे सिस्टम को एक बेहतर मैनेजमेंट की जरूरत है.
  • साल 1924 में उन्होंने आम बजट से रेल बजट को अलग करने का प्रस्ताव रखा. इसके लिए साल 1920-21 में एक दस सदस्यों वाली समिति बनाई गई. यह समिति ब्रिटिश अर्थशास्त्री विलियम एम एक्वर्थ के नेतृत्व में बनी.
  • एक्वर्थ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में रेल बजट को सामान्य बजट से अलग पेश करने का सुझाव दिया क्योंकि, अकेला रेल विभाग भारत की सबसे बड़ी आर्थिक गतिविधियों का संचालन करता था.
  • साल 1924 में पूरे देश के बजट में रेल बजट की हिस्सेदारी 70 फीसदी थी. देश के बजट में रेल बजट की इतनी अधिक हिस्सेदारी देखकर रेल बजट को आम बजट से अलग करने का विलियम का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया.
  • जब साल 1924 में रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया था, उस समय रेलवे का प्रयोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 75 फीसदी और माल ढुलाई में 90 फीसदी तक होता था.
  • यद्यपि भारतीय संविधान में कहीं भी रेल बजट जैसे शब्द का वर्णन नहीं है. इसे संविधान के अनुच्छेद 112 और 204 के अंतर्गत ही लोकसभा में पेश और पास किया जाता है.
  • आम तौर पर रेल बजट आम बजट से कुछ दिन पहले पेश किया जाता है. इसमें पिछले वित्त वर्ष का आर्थिक सर्वेक्षण भी किया जाता है.
  • भारतीय रेल, भारत में एक सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (पीएसयू) है. यह लगभग 13.6 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करती है.
  • बिहार के भूतपूर्व मुख्य मंत्री लालू प्रसाद यादव के नाम लगातार 6 बार रेल बजट प्रस्तुत करने का रिकॉर्ड है. वे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में 2004 -2009 के बीच रेल मंत्री थे.
  • ममता बनर्जी रेल बजट पेश करने वाली पहली महिला रेल मंत्री हैं. साल 2002 में उन्होंने रेल बजट प्रस्तुत किया था.

First published: 13 August 2016, 16:54 IST
 
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