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राजन काल में बैंकिंग स्टॉक से मालामाल हुए निवेशक

अभिषेक पराशर | Updated on: 22 June 2016, 15:10 IST
QUICK PILL
  • राजन के कार्यकाल के दौरान बैंकिंग सेक्टर पर भरोसा दिखाने वाले निवेशकों को शानदार रिटर्न मिला. आरबीआई का गवर्नर रहते हुए राजन ने बैंकिंग क्षेत्र में कई अहम बदलाव किए और इसका सीधा फायदा निवेशकों को मिला.
  • 10 से अधिक बैंकिंग स्टॉक्स ने निवेशकों को राजन के तीन साल के कार्यकाल में 105 फीसदी से लेकर 368 फीसदी तक का शानदार रिटर्न दिया.
  • राजन के गवर्नर बनने के बाद बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमश: 45 और 54 फीसदी की मजबूती आई. लेकिन इस बीच बीएसई बैंकेक्स और बैंकिंग निफ्टी में 105 फीसदी की उछाल देखने को मिली.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का गवर्नर बनने से पहले 2008 में रघुराम राजन कमेटी की वित्तीय सुधार को लेकर रिपोर्ट आई थी. रिपोर्ट में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सुचारु रूप से चलाने के लिए बैंकों के बोर्ड को मजबूत बनाने के साथ शेयरहोल्डर्स को अधिक ताकत देने की सिफारिश की गई थी.

2013 में गवर्नर बनने के बाद राजन ने सबसे पहले बैंकिंग सुधार को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करना शुरू किया. बैंकिंग सुधार को बतौर गवर्नन राजन के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाएगा. जब उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा की, तब बैंकिंग सुधारों के पटरी से उतरने की आशंका जताई जाने लगी थी. 

अगस्त 2013 के बाद से राजन ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर बैंकिंग सिस्टम में सुधार के लिए कई कदम उठाए. उनकी कोशिश बैंकों के बढ़ते एनपीए को कम कर ग्रोथ को मजबूत करने की थी. 

पिछले वित्त वर्र्ष की आखिरी तिमाही में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को रिकॉर्ड 5,367 करोड़ रुपये का घाटा, देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के भीतर बढ़ रहे एनपीए की एक बानगी भर है. बैंकों के बढ़ते एनपीए की वजह से सरकार के समक्ष बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की फंडिंग की समस्या सामनेे आई. तेज ग्रोथ के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को रोका नहीं जा सकता था और बैंक इस हालत में नहीं थे कि वह और बड़ी परियोजनाओं को नकदी मुहैया करा पाते.

सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए दोतरफा नीति अपनाई. पहला एनपीए से जुड़े प्रावधानों को सख्त करने की दिशा में आरबीआई ने कोशिश शुरू की तो दूसरी तरफ सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान बैंकों को 25,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने के फैसले पर मुहर लगाई ताकि बैंकों को नकदी की समस्या नहीं हो.

निवेशकों को मिला शानदार रिटर्न

राजन के कार्यकाल के दौरान बैंकिंग सेक्टर पर भरोसा दिखाने वाले निवेशकों को शानदार रिटर्न मिला. आरबीआई का गवर्नर रहते हुए राजन ने बैंकिंग क्षेत्र में कई अहम बदलाव किए और इसका सीधा फायदा निवेशकों को मिला.

इंडिया इंफोलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक 10 से अधिक बैंकिंग स्टॉक्स ने निवेशकों को राजन के तीन साल के कार्यकाल में 105 फीसदी से लेकर 368 फीसदी तक का शानदार रिटर्न दिया.

राजन 4 सितंबर 2013 को आरबीआई का गवर्नर बने थे. राजन के गवर्नर बनने के बाद बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमश: 45 और 54 फीसदी की मजबूती आई. लेकिन इस बीच बीएसई बैंकेक्स और बैंकिंग निफ्टी में 105 फीसदी की उछाल देखने को मिली.

बैंकिंग सेक्टर पर अधिक ध्यान देने की वजह से ही निवेशकों को बैंकिंग शेयरों से दमदार मुनाफा कमाने में मदद मिली. हालांकि राजन के तीन सालों के कार्यकाल के दौरान निजी बैंकों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुकाबले ज्यादा मुनाफा कमाकर दिया.

13 निजी बैंकों में से केवल जम्मू एंड कश्मीर बैंक ने इस दौरान निवेशकों का पैसा डुबोया. जेएंडके बैंक ने निवेशकों को -34 फीसदी का रिटर्न दिया.

वहीं दूसरी तरफ यस बैंक ने राजन के तीन सालों के कार्यकाल के दौरान निवेशकों को शानदार 368 फीसदी का मुनाफा दिया. यानी जिन्होंने यस बैंक में निवेश किया था उनकी संपत्ति तीन सालों के दौरान साढ़े तीन गुणा हो गई.

10 से अधिक बैंकिंग स्टॉक्स ने निवेशकों को 105 फीसदी से 368 फीसदी तक का रिटर्न दिया

वहीं 21 सार्वजनिक बैंकों में से 13 ने निवेशकों को शानदार मुनाफा कमाकर दिया. आईआईएफएल की रिपोर्ट बताती है कि इंडियन बैंक और स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर ने निवेशकों के धन को दोगुना कर दिया.

नुकसान भी कम नहीं

भारतीय बैंकों को तेज ग्रोथ दिलाने की राजन की कोशिशों के बावजूद उनके कार्यकाल में 9 बैंकों ने निवेशकों का नुकसान किया. सार्वजनिक क्षेत्र के 8 बैंकों ने 9 फीसदी से लेकर 28 फीसदी के बीच नकारात्मक रिटर्न दिया. 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सामने सबसे बड़ी समस्या एनपीए की रही जिससे उनके ग्रोथ को झटका लगा. इसमें सबसे ज्यादा नुकसान जेएंडके बैंक ने दिया. इसके अलवा बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन बैंक, देना बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इलाहाबाद ने निवेशकों का पैसा डुबोया.

राजन के इस्तीफे के बाद पनप रही आशंकाओं को खारिज करते हुए रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा था कि भारत के साख पर इस इस्तीफे से कोई असर नहीं होगा. फिच ने कहा था कि जहां तक भारत की रेटिंग का सवाल है तो उस मामले में व्यक्ति विशेष के मुकाबले नीतियां ज्यादा अहम होंगी.

हालांकि फंड प्रबंधकों को लगता है कि राजन के जाने से थोड़े समय के लिए ही सही लेकिन इक्विटी मार्केट पर इसका असर जरूर होगा.

First published: 22 June 2016, 15:10 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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