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आर्थिक सुधार का अगला अध्याय, राज्यसभा में पारित हुआ जीएसटी संविधान संशोधन बिल

अभिषेक पराशर | Updated on: 4 August 2016, 9:00 IST
QUICK PILL
  • लंबे राजनीतिक गतिरोध के बाद राज्यसभा ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को पारित कर दिया. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार है.
  • राज्यसभा में जीएसटी विधेयक निर्विरोध पारित हुआ. संसद के उच्च सदन में  इस विधेयक के पक्ष में 203 वोट पड़े जबकि विरोध में शून्य.
  • सिर्फ जयललिता की ऑल इंडिया अन्ना द्रमुक (एआईडीएमके) के सांसदों ने इस मतदान से खुद को दूर रखते हुए सदन से वाकआउट किया.
  • एआईडीएमके ने कहा, \'जीएसटी की वजह से तमिलनाडु को स्थायी तौर पर नुकसान होगा और यह संविधान के आधारभूत संरचना के खिलाफ जाता है.\'

लंबे राजनीतिक गतिरोध के बाद राज्यसभा ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) संविधान संशोधन बिल को पारित कर दिया. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार है. 

नब्बे के आर्थिक उदारीकरण के बाद जीएसटी विधेयक को आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए गए सबसे बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है.

राज्यसभा में जीएसटी विधेयक निर्विरोध पारित हुआ. संसद के उच्च सदन में  इस विधेयक के पक्ष में 203 वोट पड़े जबकि विरोध में शून्य. सिर्फ तमिलनाडु ऑल इंडिया अन्ना द्रमुक (एआईडीएमके) के सांसदों ने इस मतदान से खुद को दूर रखा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सहयोगात्मक संघवाद की जीत बताया. उन्होंने कहा, 'मैं बताना चाहता हूं कि जीएसटी सहयोगात्मक संघवाद की बेहतरीन मिसाल बनेगा. साथ मिलकर हम भारत को तरक्की की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे.' 

राज्यसभा से पारित किए जाने के बाद अब इस विधेयक को लोकसभा में भेजा जाएगा. हालांकि यह बिल पहले ही लोकसभा में पास हो चुका है लेकिन इसमें सरकार ने संशोधन किए हैं इसलिए इस पर लोकसभा की मंजूरी लेनी होगी. 

लोकसभा में बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत है, इसलिए उसे बिल में किए गए बदलाव को मंजूरी दिलाने में कोई परेशानी नहीं होगी. संविधान संशोधन विधेयक होने की वजह से लोकसभा से पास होने के बाद इस विधेयक को देश के आधे राज्यों की विधानसभा में अनुमोदित किया जाएगा.

माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने में करीब छह महीने का समय लगेगा. जीएसटी को लागू किए जाने की दिशा में अब किसी तरह की आर्थिक और प्रशासनिक दिक्कतों का सामना नहीं करना होगा. 

जीएसटी करीब दर्जन भर से अधिक करों की जगह लेगा. हालांकि इसके लागू होने से कई वस्तुएं और सेवाएं महंगी हो जाएंगी. साथ ही कुछ सेवाएं और वस्तुएं सस्ती भी होंगी. जीएसटी की दर तय होने के बाद इस बारे में स्थिति साफ हो सकेगी. 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सदन को आश्वासन देते हुए कहा कि जीएसटी के तहत कर को यथासंभव नीचे रखा जाएगा. जीएसटी की दर 18 फीसदी तय किए जाने की संवैधानिक लिमिट को लेकर चर्चा का जवाब देते हुए जेटली ने कहा, 'हम दर का कम से कम रखेंगे और यह निश्चित तौर आज की मौजूदा दर से कम होगा.'

राज्यसभा में जीएसटी विधेयक निर्विरोध पारित हुआ. संसद के उच्च सदन में इस विधेयक के पक्ष में 203 वोट पड़े

लेकिन यह तय है कि जीएसटी लागू होने के बाद कुछ समय के लिए महंगाई में तेज बढ़ोतरी होगी. लगातार दो बार सूखा और बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार इस विधेयक को संभवत: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद ही लागू करने के बारे में सोचेगी. इस दौरान टेक्नोलॉजी और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा किए जाने का काम पूरा कर लिया जाएगा.

जेटली ने कहा, 'हाल के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार है.' सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा, 'जीएसटी से देश के आर्थिक प्रबंधन में जबरदस्त सुधार होगा और इससे राज्यों को मजबूती मिलेगी.'

जीएसटी लागू होने के बाद देश में मौजूद जटिल कर ढांचा खत्म होगा और इसकी जगह एक आसान और सरल कर व्यवस्था अस्तित्व में आएगी. 

एक फीसदी अतिरिक्त कर के साथ विपक्ष ने छह संशोधन पेश किए थे. नई कर व्यवस्था सामने आने के बाद सभी केंद्रीय और राज्य कर खत्म हो जाएंगे. जीएसटी लागू होने के बाद केंद्रीय उत्पाद शुल्क, एडीशनल ड्यूटीज ऑफ एक्साइज एंड कस्टम्स, स्पेशल एडीशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम्स, सर्विस टैक्स और सेस खत्म हो जाएंगे. 

वहीं राज्यों की तरफ से लिए जाने वाले कर वैट, सेंट्रल सेल्स टैक्स, पर्चेज टैक्स, लग्जरी टैक्स, एंट्री टैक्स, एंटरटेनमेंट टैक्स, स्टेट से और सरचार्ज भी खत्म हो जांएगे.

जेटली ने कहा कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद भारत के जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पादन में करीब 2 फीसदी की उछाल आएगी.

खत्म हुआ राजनीतिक गतिरोध

जीएसटी पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई थी. कांग्रेस ने 2006 में इस बिल को पेश किया था लेकिन तब गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने राज्यों को होने वाले नुकसान का हवाला देते हुए इस विधेयक का विरोध किया था.

जीएसटी को लेकर कांग्रेस की कुछ अहम मांग थी जिसे सरकार ने मान लिया. सरकार ने कांग्रेस के एक फीसदी के अतिरिक्त कर को वापस लेने की मांग को मान लिया. 

संविधान संशोधन विधेयक (122वां) विधेयक पर हो रही चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत कर को यथासंभव नीचे रखा जाएगा.

2005 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आम बजट में जीएसटी के विचार को सामने रखा था

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सदन को बताया, 'देश जीएसटी के लिए तैयार है. हम इसे और अधिक बेहतर बनाना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका.' 

जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद के फैसलों में दो तिहाई मत राज्यों और एक तिहाई मत केंद्र सरकार का होगा. उन्होने कहा कि इस नए कानून से राज्यों के राजस्व में बढ़ोतरी होगी और कर चोरी की घटनाओं पर विराम लगेगा. 

कर विवाद की स्थिति में उसका निपटारा जीएसटी परिषद में किया जाएगा और अगर परिषद में इसका समाधान नहीं निकल पाता है तो परिषद ही यह तय करेगा कि इस समस्या को किस तरह से सुलझाया जाए.

वित्तमंत्री ने इसे ऐतिहासिक कर सुधार बताते हुए कहा कि जीएसटी का विचार वर्ष 2003 में केलकर वर्कफोर्स की रिपोर्ट में सामने आया था. 

2005 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आम बजट में जीएसटी के विचार को सार्वजनिक तौर पर सामने रखा था.

जेटली ने कहा कि जीएसटी का मकसद भारत को एक बाजार के रूप में समन्वित करना और कराधान में एकरूपता लाना है. उन्होंने कहा कि जीएसटी से पीने वाले अल्कोहल को बाहर रखा गया है तथा पेट्रोलियम उत्पादों के बारे में जीएसटी परिषद तय करेगी.

बढ़ेगी महंगाई

आर्थिक मामलों के जानकार लोगों का कहना है कि जिस भी देश ने अपने यहां जीएसटी लागू किया है वहां महंगाई बढ़ी है.  कृषि अर्थशास्त्री देवेंद्र शर्मा का कहना है कि जीएसटी पास होने के बाद तीन सालों तक महंगाई बढ़ सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि जिस सरकार ने अपने देश में जीएसटी बिल को लागू किया है उसे अगले चुनाव में महंगाई के चलते हार का सामना करना पड़ा है.

अगले साल उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाला है. सरकार ने जीएसटी को लागू करने की समयसीमा 1 अप्रैल, 2017 को तय की है.

जीएसटी को मनी बिल की तरह पेश ना हो

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक पास होने के बाद मूल जीएसटी विधेयक को मनी बिल की जगह वित्त विधेयक के तौर पर पेश करने की मांग दोहराई है. चिदंबरम ने कहा कि इस बिल पर दोनों सदनों की मुहर लगना जरूरी है, इसलिए इसे मनी बिल के रूप में नहीं लाया जाना चाहिए. आपको बता दें कि मनी बिल को संसद में पेश करने की बाध्यता नहीं होती.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वह इस संबंध में कोई भी आश्वासन देने की स्थिति में नहीं हैं. जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद ने अभी तक विधेयक का मसौदा तैयार नहीं किया है. वह इस बात का आश्वासन दे सकते हैं कि इस संबंध में लाए जाने वाले विधेयक संविधान और परम्पराओं के अनुरूप होंगे.

इस पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, वित्तमंत्री चर्चा से बचने के लिए आने वाले नवंबर में जीएसटी को मनी बिल के तौर पर पेश कर देंगे, जैसे उन्होंने पूर्व में आधार और प्राइवेट मेंबर बिल के साथ किया था.

First published: 4 August 2016, 9:00 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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