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RBI board meeting: क्या चुनावी साल में RBI से ये फायदा चाहती है मोदी सरकार ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 November 2018, 11:16 IST

भारत के मौद्रिक नीति निर्माता और मोदी सरकार के अधिकारी सोमवार को एक बोर्ड मीटिंग में मिल रहे हैं. इस मीटिंग से उम्मीद जताई जा रही है कि आरबीआई और केंद्र के बीच लगातार बिगड़ते रिश्तों में सुधार आएगा. इस बैठक में इस बात पर भी चर्चा होगी कि केंद्रीय बैंक को कितनी पूंजी की जरूरत है. हालही में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता का सवाल उठाया था. हालही में मोदी सरकार ने स्वामीनाथन गुरुमूर्ति, जो पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, को आरबीआई की निदेशक मंडल में शामिल किया था, जिनका उस पूरे मामले में बड़ा रोल माना जा रहा है.

विपक्ष का आरोप है कि इस चुनावी साल में केंद्र आरबीआई से ज्यादा रिजर्व चाहता है और आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल इसके विरोध में हैं. गुरुमूर्ति जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आर्थिक विंग से जुड़े हैं, उन्होने इन रिपोर्ट से इंकार किया कि सरकार केंद्रीय बैंक के अधिशेष रिजर्व मांग रही थी. उन्होंने कहा कि केंद्र केवल एक नीति चाहता है कि किसे कितना भंडार रखना चाहिए.

 

आरबीआई ने केंद्र को महज 30 हजार करोड़ रुपये का लाभांश दिया, के जबकि बजट 66 हजार करोड़ रुपये का था. केंद्रीय वित्त मंत्री आरबीआई से और भुगतान की मांग की लेकिन बैंक ने इनकार कर दिया.

मीडिया रिपोर्ट के कभी रघुराम राजन की पहली पसंद माने जाने वाले नचिकेत मोर को उनके कार्यकाल खत्म होने से पहले ही बोर्ड से हटा दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार नचिकेत मोर सरकार द्वारा मांगे गए अधिक रिजर्व का विरोध कर रहे थे. उन्होएँ आरोप यहभी लगाया था कि सरकार बोर्ड में अपने पसंदीदा लोगों भर्ती कर रही है. जिनमे आरएसएस से जुड़े एस. गुरुमूर्ति और सतीश मराठे भी शामिल हैं.

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First published: 19 November 2018, 11:16 IST
 
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