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4 साल में देश के 21 सरकारी बैंकों ने जितना कर्ज वसूला उससे सात गुना माफ कर दिया : RBI

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 October 2018, 10:13 IST

अप्रैल 2014 और अप्रैल 2018 के बीच देश के 21 सरकारी बैंकों ने कुल 3,16,500 करोड़ रुपए का लोन बट्टे खाते में डाला और कुल 44900 करोड़ रुपए का क़र्ज़ वसूल किया. यानी इन बैंकों ने जितना कर्ज वसूला उससे लगभग सात गुना माफ़ कर दिया. आंकड़ों के अनुसार चार साल की अवधि के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) द्वारा बट्टे खाते में डाली गई राशि 2018-19 के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर प्रस्तावित बजटीय व्यय से दोगुना है, जो 1.38 लाख करोड़ रुपये है. इसके अलावा अप्रैल 2014 से अप्रैल 2018 तक 21 पीएसबी द्वारा बट्टे खाते में डाला गया ऋण 2014 तक 10 वर्षों में 166 प्रतिशत से अधिक था.

केंद्रीय बैंक द्वारा वित्त पर संसदीय स्थायी समिति के समक्ष अपने सबूत के जवाब पेश आंकड़ों के मुताबिक 21 पीएसबी की वसूली दर साल के दौरान मार्च-अंत 2018 में 14.2 फीसदी रही. यह निजी बैंकों की वसूली दर 5 से तीन गुना अधिक है. आंकड़ों के अनुसार साल 2014 तक एनपीए में वृद्धि नहीं हुई लेकिन इसके बाद नाटकीय वृद्धि हुई चूंकि, विशेष रूप से 2015-16 के बाद. यह आरबीआई द्वारा 2014 में बैंकों की संपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (एक्यूआर) उपक्रम के कारण है.

 

2004 और 2014 के बीच पीएसबी द्वारा 1.9 लाख करोड़ से कम लोन बट्टे खाते में डाला गया. 2014-15 में एनपीए 4.62 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 7.7 9 प्रतिशत हो गया और दिसंबर 2017 तक 10.41 प्रतिशत तक पहुंच गया. 2017 के अंत तक एक्यूआर के परिणामस्वरूप, पीएसबी के सकल एनपीए 7.70 लाख करोड़ रुपये तक थी. बैड लोन में इस वृद्धि के कारण पीएसबी को अपेक्षित घाटे के कारण अग्रिम प्रावधान करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

2017 में आरबीआई ने दिवालियापन और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के तहत संदर्भित मामलों को निर्धारित करने के लिए एक आंतरिक सलाहकार समिति गठित की, जो बैड लोन की समय-समय पर वसूली के लिए एक मंच है. इसकी सिफारिशों के आधार पर दो शाखाओं में 41 खातों की पहचान की गई. पूरे एनपीए में 12 खातों में लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं, जून 2017 से एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में गए हैं.

First published: 1 October 2018, 9:48 IST
 
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