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RBI के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने 6 महीने पहले दिया पद से इस्तीफा: रिपोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 June 2019, 10:12 IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपने कार्यकाल की समाप्ति से छह महीने पहले इस्तीफा दे दिया है. बिजनेस स्टैंडर्ड ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि आचार्य फरवरी 2020 के बजाय अगस्त 2020 में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस (एनवाईयू स्टर्न) में वापस जा रहे रहे हैं, जहां वह प्रोफेसर की भूमिका में काम करेंगे.

हालांकि इस मामले में अभी आरबीआई की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है. आरबीआई की स्वायत्ता को लेकर आचार्य के भाषण ने पिछले साल अक्टूबर में खूब सुर्खियां बटोरी थीं. आचार्य ने एक केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता के महत्व पर बल दिया था और कहा था कि केंद्रीय बैंक के परिचालन में सरकार द्वारा सीधे हस्तक्षेप से इसकी स्वायत्तता पर नकारात्मक असर पड़ेगा. हालही में मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास और विरल आचार्य के बीच वित्तीय घाटा इसके आकलन के मुद्दे पर असहमति की बात सामने आयी थी. 


क्या कहा था आचार्य ने ? 

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने चेतावनी देते हुए कहा था कि केंद्रीय बैंक की आजादी को कमजोर करना एक त्रासदी जैसा हो सकता है. उनकी यह टिप्पणी तब आयी थी जब माना जा रहा था कि चुनाव से पहले सरकार अपनी नीतियों को रिलेक्स देने शक्तियों को कम करने के लिए सरकारी दबाव बढ़ रही है. उन्होंने उद्योगपतियों के साथ एक भाषण में 2010 में अर्जेंटीना सरकार की दिक्कत का हवाला देते हुए बताया कि क्या गलत हो सकता है. 

इस दौरान तत्कालीन गवर्नर उर्जित पटेल भी वहां मौजूद थे. हलांकि इसके कुछ समय बाद उर्जित पटेल ने इस्तीफ़ा दे दिया था. जनवरी, 2017 में आरबीआई में डिप्टी गवर्नर के रूप में शामिल होने वाले आचार्य को इस भूमिका में तीन साल पूरे करने के बाद अपना कार्यकाल समाप्त करना था.

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First published: 24 June 2019, 9:07 IST
 
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