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क्या CBI के बाद अब RBI भी मोदी सरकार से टकराने के मूड में है ?

सुनील रावत | Updated on: 27 October 2018, 16:27 IST

केंद्र सरकार और सीबीआई के ताजा विवाद के बाद अब भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) भी सरकार से संघर्ष के मूड में दिखाई दे रही है. सरकार और आरबीआई के बीच बढ़ते इस नीति संघर्ष के संकेत एक शीर्ष बैंक अधिकारी ने शुक्रवार को दिए. आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य Viral Acharya ने चेतावनी दी कि केंद्रीय बैंक की आजादी को कमजोर करना एक त्रासदी जैसा हो सकता है.

भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य की टिप्पणियों से पता चलता है कि केंद्रीय बैंक पर आगामी लोकसभा चुनाव से पहले अपनी नीतियों को रिलेक्स देने शक्तियों को कम करने के लिए सरकारी दबाव बढ़ रहा है. यही कारण है कि बीते सप्ताहों में भारतीय वित्तीय बाजार गिर रहा हैं.

शीर्ष उद्योगपतियों के साथ एक भाषण में उन्होंने 2010 में अपने केंद्रीय बैंक के मामलों में अर्जेंटीना सरकार की दिक्कत का हवाला देते हुए बताया कि क्या गलत हो सकता है. उन्होंने कहा अगर सरकार केंद्रीय बैंक की आजादी का सम्मान नहीं करेगी तो उसे आर्थिक बाजारों की नाराजगी का शिकार होना पड़ेगा. इस दौरान वहां भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल भी मजूद थे और उन्होंने भाषण के लिए और सुझाव के लिए उनका धन्यवाद दिया.

सरकार ने ने हाल ही में आरबीआई को कुछ बैंकों पर अपने ऋण प्रतिबंधों को रेलक्स देने के लिए बुलाया था. मीडिया में यह भी खबरें आयी थी कि सरकार देश के पेमेंट सिस्टम के लिए एक अलग से रेगुलेटर बनाने की संभावना पर विचार कर रही है. फिलहाल से आरबीआई देखता है. आचार्य ने कहा कि केंद्रीय नियामक और पर्यवेक्षी शक्तियों में केंद्रीय बैंक के लिए प्रभावी आजादी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है. आचार्य ने कहा, "केंद्रीय बैंक की आजादी को कमजोर करने का जोखिम संभावित रूप से विनाशकारी है.

वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता डीएस मलिक ने शनिवार को कहा कि उन्होंने आचार्य के बयान को पढ़ा था लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों से परामर्श किए बिना इस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. एक सरकारी सूत्र ने शुक्रवार को आचार्य के भाषण से पहले रॉयटर्स से कहा, "आरबीआई की पूरी आजादी देने की मांग को स्वीकार करने का कोई मौका नहीं है. यह हर संस्थान की तरह संसद के लिए भी उत्तरदायी है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने 11 ऐसे राज्य संचालित बैंकों की पहचान की है जो फ़िलहाल ऋण देने के लिए प्रतिबंधित हैं जब तक कि वे अपनी बैलेंस शीट पर बैड लोन सुधार नहीं लेते. फ़िलहाल सरकार दबाव में है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.

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First published: 27 October 2018, 16:25 IST
 
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