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जियो के बाद स्पेक्ट्रम नीलामी में आक्रामक बोली लगाने को तैयार टेलीकॉम कंपनियां

अभिषेक पराशर | Updated on: 24 September 2016, 16:20 IST
QUICK PILL
  • 1 अक्टूबर को होने जा रही नीलामी में कुल सात टेलीकॉम कंपनियां भाग लेंगी. डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम की तरफ से जारी सूचना में कहा गया है कि रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया सेल्युलर, टाटा टेलीसर्विसेज, रिलायंस कम्युनिकेशन और एयरसेल में से किसी कंपनी ने अपने आवेदन को वापस नहीं लिया है. 
  • रिलायंस कम्युनिकेशन और एयरसेल आगामी स्पेक्ट्रम नीलामी में अलग-अलग कंपनी के तौर पर बोली लगाएगी. जियो की आधिकारिक लॉन्चिंग की घोषणा के तत्काल बाद टेलीकॉम बाजार में शुरू हुए एकीकरण की कोशिश के तहत ही रिलायंस कम्युनिकेशन ने एयरसेल के अधिग्रहण की घोषणा की थी.
  • डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन ने आवेदन वापस लेने की तारीख 22 सितंबर तय की थी और इसी दिन रिलायंस कम्युनिकेशन और एयरसेल ने विलय की घोषणा की थी. उपभोक्ता संख्या के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशन देश की चौथी बड़ी टेलीकॉम कंपनी है. 

रिलायंस कम्युनिकेशन और एयरसेल आगामी स्पेक्ट्रम नीलामी में अलग-अलग कंपनी के तौर पर बोली लगाएगी. जियो की आधिकारिक लॉन्चिंग की घोषणा के तत्काल बाद टेलीकॉम बाजार में शुरू हुए एकीकरण की कोशिश के तहत ही रिलायंस कम्युनिकेशन ने एयरसेल के अधिग्रहण की घोषणा की थी.

1 अक्टूबर को होने जा रही नीलामी में कुल सात टेलीकॉम कंपनियां भाग लेंगी. डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम की तरफ से जारी सूचना में कहा गया है कि रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया सेल्युलर, टाटा टेलीसर्विसेज, रिलायंस कम्युनिकेशन और एयरसेल में से किसी कंपनी ने अपने आवेदन को वापस नहीं लिया है. 

डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन ने आवेदन वापस लेने की तारीख 22 सितंबर तय की थी और इसी दिन रिलायंस कम्युनिकेशन और एयरसेल ने विलय की घोषणा की थी. उपभोक्ता संख्या के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशन देश की चौथी बड़ी टेलीकॉम कंपनी है. 

रिलायंस कम्युनिकेशन अंबानी परिवार में बंटवारे के बाद मुकेशन अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी की कंपनी अनिल धीरू भाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी) के पास चली गई. 

90 के दशक में भारत में हुई टेलीकॉम क्रांति में इस कंपनी की बड़ी भूमिका रही थी. अब बड़े भाई मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम की मदद से टेलीकॉम बिजनेस में कदम रख दिया है.

रिलायंस कम्युनिकेशन पूर्वोत्तर और असम को छोड़कर देश के बाकी सर्किलों में स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाएगी. वहीं एयरसेल पर नीलामी में भाग लेने के लिए कई तरह की बंदिशें भी हैं. 

कंपनी 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज वाले स्पेक्ट्रम के लिए किसी भी सर्किल में बोली नहीं  लगा सकती. एयरसेल 22 सर्किल में से 13 सर्किल में बोली लगा सकती है. इसमें तमिलनाडु, पूर्वी उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार और कर्नाटक शामिल है. कंपनी केवल 900 और 1800 मेगाहर्ट्ज के लिए देश के सभी सर्किलों में बोली लगा सकती है.

जियो को बढ़त

वहीं रिलायंस की जियो को किसी भी सर्किल में बोली लगाने की अनुमति है. जियो एकमात्र वैसी कंपनी है जिसे देश भर में 700 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाने की अनुमति है. कंपनी ने नीलामी के लिए 6,500 करोड़ रुपये जमा किए हैं.

जियो देश की एकमात्र वैसी कंपनी है जिसके पास पूरे देश भर में 4जी का लाइसेंस है. जून 2010 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इंफोटेल ब्रॉडबैंड सर्विसेज लिमिटेड (आईबीएसएल) की 96 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली थी. 

आईबीएसएल हालांकि अभी मार्केट में लिस्ट नहीं हुई है लेकिन कंपनी के पास सभी 22 सर्किल में 4जी लाइसेंस मिला हुआ है. बाद में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस कंपनी का नाम बदलकर रिलायंस जियो इंफोकॉम कर दिया. 

कंपनी ने 5 सितंबर 2016 को 4जी सेवाओं को आधिकारिक तौर पर शुरू किए जाने की घोषणा कर देश की अन्य कंपनियों को दबाव में ला दिया है. 

उपभोक्ता संख्या के आधार पर देश की सबसे बड़ी कंपनी एयरटेल, दूसरी बड़ी कंपनी वोडाफोन, तीसरी बड़ी कंपनी आइडिया और चौथी बड़ी रिलायंस कम्युनिकेशन के ऊपर खुद को बाजार में बनाए रखने की बड़ी चुनौती ही है. 

जियो की आक्रामक रणनीति को देखते हुए इन कंपनियों को नेटवर्क विस्तार पर बड़ी पूंजी खर्च करने की जरूरत होगी और इसके तहत  कंपनियां स्पेक्ट्रम नीलामी में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है.

वोडाफोन इंडिया को हाल ही में वोडाफोन पीएलसी से 7.5 अरब डॉलर (47,700 करोड़ रुपये) की पूंजी मिली है.

गुरुवार को ही वोडाफोन पीएलसी ने अपनी सहायक कंपनी वोडाफोन इंडिया में करीब रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिलायंस जियो इन्फोकॉम की चुनौती से निपटने के लिए वोडाफोन इंडिया को उसकी प्रोमोटर कंपनी का सहारा मिला है. वोडाफोन इंडिया को वोडाफोन पीएलसी से 7.5 अरब डॉलर (47,700 करोड़ रुपये) की पूंजी मिली है.

माना जा रहा है कि वोडाफोन पीलएसी से मिली रकम का इस्तेमाल कंपनी स्पेक्ट्रम की आक्रामक खरीदारी में करेगी. अनुमान के मुताबिक वोडाफोन इंडिया 16,300 करोड़ रुपये इस पर खर्च कर सकती है. वोडाफोन इंडिया को भी देश के किसी सर्किल में किसी भी बैंड की स्पेक्ट्रम नीलामी में बोली लगाने की अनुमति मिली हुई है.

यह पहली बार है जब सरकार 700 मेगाहर्ट्ज बैंड की नीलामी करने जा रही है. सरकार ने 4,01,975 करोड़ रुपये की कीमत के स्पेक्ट्रम को नीलाम करने की योजना बनाई है. वहीं टाटा टेलीसर्विसेज ने नीलामी के लिए 1,000 करोड़ रुपये जमा किए हैं जबकि रिलायंस कम्युनिकेशन ने 313 करोड़ तो एयरसेल ने 120 करोड़ रुपये जमा किए हैं. 

रिलायंस की जियो से निपटने के लिए आगे आई वोडाफोन की प्रोमोटर कंपनी वोडाफोन पीएलसी

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First published: 24 September 2016, 16:20 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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