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ई-कॉमर्स में 100 फीसदी एफडीआई से रियल एस्टेट भरेगा ऊंची उड़ान

अभिषेक पराशर | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
QUICK PILL
  • मांग की कमी से जूझ रही रियल एस्टेट इंडस्ट्री ने ई कॉमर्स में शत प्रतिशत एफडीआई के फैसले का स्वागत किया है.
  • रियल एस्टेट इंडस्ट्री का कहना है कि सरकार के इस कदम से नई कंपनियों के भारतीय बाजार में आनेे का रास्ता साफ होगा और इसका सीधा फायदा रियल एस्टेट इंडस्ट्री को होगा.
  • एक अनुमान के मुताबिक भारत में ई-कॉमर्स की बिक्री 2015 के 14 अरब डॉलर से बढ़कर 2018 में 55 अरब डॉलर होने की उम्मीद है.

सरकार ने ई-कॉमर्स में 100 फीसदी विदेशी पूंजी (एफडीआई) की अनुमति दे दी है. पिछले एक दशक में इंटरनेट के जबरदस्त प्रसार और शहरीकरण में आई तेजी ने ई-कॉमर्स को हवा दी है और इसका खामियाजा ऑफलाइन स्टोर्स को चुकाना पड़ा है. 

फ्यूचर ग्रुप, भारती रिटेल और रिलायंस रिटेल जैसे बड़े रिटेलर्स को फ्लिपकार्ट, एमेजॉन और स्नैपडील के हाथों बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. 

ऑनलाइन रिटेलर्स ने न केवल उपभोक्ताओं को घर बैठे खरीदारी का विकल्प देकर ऑफलाइन रिटेलर्स की मुश्किलें बढ़ाई है बल्कि प्रॉडक्ट्स पर जबरदस्त छूट देकर उनके बिजनेस को खतरे में डाल दिया है. हालांकि अब नए नियमों के सामने आने के बाद ई-रिटेलर्स के लिए छूट देना मुश्किल होगा.

छूट नहीं दे पाएंगे रिटेलर्स

डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रोमोशन (डीआईपीपी) की तरफ से जारी नई नीति में साफ किया गया है कि ई-कॉमर्स के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां अब ग्राहकों को लुभाने के लिए कैश बैक जैसी अन्य आकर्षक सुविधाएं नहीं दे पाएंगी.   

नए नियमों के मुताबिक कंपनियों को समानों और सेवाओं की बिक्री के दौरान ग्राहकों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करेन की अनुमति नहीं होगी. 

भारत में ई-कॉमर्स की बिक्री 2015 के 14 अरब डॉलर से बढ़कर 2018 में 55 अरब डॉलर होने की उम्मीद है

एशिया प्रशांत में भारत में ई-कॉमर्स में सबसे अधिक तेजी से बढ़ोतरी हुई है. 2014 में जहां ऑनलाइन रिटेल के कारोबार में 133.8 फीसदी की वृद्धि दर देखने को मिली वहीं 2015 में इसकी रफ्तार 129.5 फीसदी रही. 

एक अनुमान के मुताबिक भारत में ई-कॉमर्स की बिक्री 2015 के 14 अरब डॉलर से बढ़कर 2018 में 55 अरब डॉलर होने की उम्मीद है.

नई कंपनियों को मिलेगी मदद

हालांकि ई-कॉमर्स में विदेश निवेश की अनुमति बढ़ाए जाने के बाद भारत के ई-कॉमर्स में चीन की सबसे बड़ी ई-रिटेलरर अलीबाबा समेत कई अन्य विदेशी कंपनियों के आने का रास्ता साफ हो गया है. कंपनियों के पास इनवेस्टर और रिटेलर के जरिये भारतीय बाजार में आने का मौका होगा. 

नई कंपनियों के आने के बाद ई-कॉमर्स बिजनेस के प्रतिस्पर्धा में तेजी आएगी. नई नीति के बाद उन निवेशकों को भारत के ऑनलाइन रिटेल बाजार में निवेश करने का मौका मिलेगा जो चीन और जापान  के बाहर पैसा लगाने से हिचकते रहे हैं.

भारत में कुल खुदरा बिक्री में ऑनलाइन रिटेल की हिस्सेदारी महज 0.8 फीसदी है

नई नीति ने निवेश और कारोबारी माहौल को लेकर मौजूद उलझनों को खत्म कर दिया है. इसके साथ ही ऑफलाइन रिटेलर्स की कई मुश्किलों को खत्म कर दिया गया है. नियम के मुताबिक ऑनलाइन रिटेलर की कुल बिक्री में 25 फीसदी से अधिक हिस्सा एक वेंडर या किसी समूह की कंपनियों का होना चाहिए. 

ऑफलाइन कंपनियों ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है. भारत में कुल खुदरा बिक्री में ऑनलाइन रिटेल की हिस्सेदारी महज 0.8 फीसदी है जबकि वैश्विक औसत 6.3 फीसदी है.

रियल एस्टेट ने किया स्वागत

मांग की कमी से जूझ रही रियल एस्टेट इंडस्ट्री ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. इंडस्ट्री का कहना है कि ऑनलाइन रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दिए जाने से नई कंपनियों के भारतीय बाजार में आनेे का रास्ता साफ होगा और इसका सीधा फायदा रियल एस्टेट इंडस्ट्री को होगा. 

जेएएल के मुताबिक नई कंपनियों को भारत में अपना ऑनलाइन कारोबार स्थापित करने के लिए ऑफिस स्पेस के साथ बैक एंड स्पेस की भी जरूरत होगी और इसके लिए वह जाहिर तौर पर देश के 7 शीर्ष शहरों को प्राथमिकता देंगे.

कंपनियां ग्राहकों तक तेजी से पहुंचने के लिए टियर 2 और टियर 3 शहरों को प्राथमिकता देंगी

दूसरा बड़ा असर वेयर हाउसिंग की डिमांड पर पड़ेगा. कंपनियां ग्राहकों तक तेजी से पहुंचने के लिए टियर 2 और टियर 3 शहरों को प्राथमिकता देंगी.

हालांकि ई-कॉमर्स के उदारीकरण में एक शर्त लगाई गई है और वह कुल बिक्री में किसी वेंडर की हिस्सेदारी को 25 फीसदी पर सीमित कर देता है. इससे ऑफलाइन और ऑनलाइन स्टोर्स को एक तरह की परिस्थितियों में कारोबार करने का उचित मौका मिलेगा.

पश्चिमी देशों में ऑनलाइन रिटेल और ऑफलाइन रिटेल में किसी तरह की जंग की स्थिति नहीं है. नए नियमों के आने के बाद भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर में भी ऐसी स्थिति बहाल करने में मदद मिलेगी. 

भारत में अभी भी ई-कॉमर्स शुरुआती अवस्था में है लेकिन इसकी वृद्धि दर बेहद अधिक है. ऐसे में नई नीतियों के सामने आने के बाद रिटेल सेगमेंट और ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेलर्स को कारोबार के लिए बेहतर मौका मिलने की उम्मीद है.

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First published: 1 April 2016, 11:36 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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