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पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने से सरकार के खजाने पर पड़ेगा इतना असर

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 October 2018, 9:59 IST

पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में कटौती केंद्र सरकार के वित्त में तनाव पैदा कर सकती है. पिछले चार सालों में सरकार ने ईंधन की कीमतों में कटौती नहीं की. अक्टूबर 2017 में एक बार छोड़कर कच्चे तेल के आयात की बढ़ती लागत के बावजूद सरकार ने उच्च उत्पाद शुल्क का लाभ लिया. कई मायनों में इससे राजकोषीय घाटे में सरकार को मदद मिली. 2016-17 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.5% था और 2017-18 में भी उसी स्तर पर जिद्दी बना रहा. हालांकि सरकार का कहना है कि पेट्रोल व डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में डेढ़ रुपये प्रति लीटर की कटौती से सरकारी खजाने पर मात्र 10,500 करोड़ रुपये का बोझ आएगा.

2017-18 में पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क से केंद्र सरकार ने 2.2 9 लाख करोड़ रुपये की कमाई की. जबकि 2016-17 में सरकार को सरकार को इससे 2.42 लाख करोड़ रूपये मिले. वर्तमान में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 19.48 प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 प्रति लीटर है.

 

वैश्विक तेल की कीमतों में गिरावट के चलते केंद्र ने नवंबर 2014 और जनवरी 2016 के बीच नौ बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया. जबकि पिछले साल अक्टूबर में सिर्फ एक बार इसमें प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की .

क्रूड पेट्रोलियम 20% डेवलपमेंट सेस और 50 रुपये प्रति मीट्रिक टन के राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (एनसीसीडी) को आकर्षित करता है. क्रूड पर कोई सीमा शुल्क नहीं है, लेकिन पेट्रोल और डीजल 2.5% का सीमा शुल्क लगता है.

ऐसे कर रहे राज्य कमाई

इसी तरह राज्य बिक्री कर या मूल्य वर्धित कर (वैट) की दरें हर राज्य में भिन्न होती हैं. उत्पाद शुल्क के विपरीत, पेट्रोलियम उत्पादों पर बिक्री कर / वैट के माध्यम से राज्यों की कमाई 2016-17 में 1.66 लाख करोड़ रुपये से 2017-18 में 1.84 लाख करोड़ रुपये हो गई. महाराष्ट्र ने 2017-18 में पेट्रोलियम उत्पादों पर बिक्री कर / वैट से 25,611 करोड़ रुपये कमाए, जो देश में सबसे ज्यादा है. इसके बाद यूपी (17,420 करोड़ रुपये), तमिलनाडु (15,507 करोड़ रुपये), गुजरात (14,852 करोड़ रुपये) और कर्नाटक ( 13,307 करोड़ रुपये) है.

साथ ही, अधिकांश राज्य जो पेट्रोल और डीजल पर उच्चतम कर दरें लगाते हैं, वे अपने सकल घरेलू उत्पाद के रूप में उच्च सकल राजकोषीय घाटे के साथ संघर्ष कर रहे हैं. उदाहरण के लिए असम में 12.7% की राजकोषीय घाटा है.

First published: 5 October 2018, 9:59 IST
 
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