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जियो से जिंदगी बचाने के लिए अब क्या करेंगी एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया!

अभिषेक पराशर | Updated on: 2 September 2016, 7:12 IST
QUICK PILL
  • मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो की शुरुआत कर मोबाइल डेटा मार्केट में खलबली मचा दी. अब उपभोक्ताओं को केवल डेटा के ही पैसे देने होंगे. फिलहाल मोबाइल उपभोक्ताओं को डेटा और वॉयस पैक अलग से खरीदना होता है.
  • अंबानी ने 31 दिसंबर 2016 तक सभी सेवाओं को मुफ्त में दिए जाने की घोषणा की है. इसके बाद की भी दर बेहद सस्ती है. मसलन कंपनी ने महज 50 रुपये में एक जीबी डेटा दिए जाने की घोषणा की है जो मौजूदा दर से करीब 500 फीसदी कम है.
  • जियो इन्फोकॉम रिलायंस इंडस्ट्रीज का अब तक का सबसे बड़ा स्टार्टअप है. जब मुकेश अंबानी कंपनी के एजीएम में देश के सबसे बड़े डिजिटल वॉर का आगाज कर रहे थे तब प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम कंपनियों भारती एयरटेल, आइडिया और रिलायंस कम्युनिकेशन में लगा निवेशकों का पैसा तेजी से डूब रहा था.

2001 की तरह एक बार फिर से रिलायंस ने मोबाइल बाजार के नियमों को पूरी तरह से बदल दिया है. 2001 और 2016 में फर्क बस इतना है कि तब रिलायंस कम्युनिकेशन नाम की कंपनी हुआ करती थी और उस वक्त धीरूभाई अंबानी की विरासत उनके बड़े बेटे मुकेश अंबानी और छोटे बेटे अनिल अंबानी के बीच रिलायंस ग्रुप और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के बीच नहीं बंटी थी. 

बंटवारे के बाद रिलायंस कम्युनिकेशन की कमान अनिल अंबानी के हाथों में चली गई और अन्य टेलीकॉम कंपनियों के मुकाबले रिलायंस कम्युनिकेशन पिछड़ती चली गई. फिलहाल वह देश के टेलीकॉम मार्केट में भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया के बाद चौथी बड़ी कंपनी है. 

इस बीच मुकेश अंबानी चौथी पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क पर काम करते रहे, जिसका नतीजा रिलायंस के सालाना अधिवेशन (एजीएम) में देखने को मिला. मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम की मदद से मोबाइल कम्युनिकेशन की दुनिया में खलबली मचा दी है. 

रिलायंस जियो आने वाले दिनों में किस कदर मौजूदा टेलीकॉम कंपनियों के बाजार को तहस-नहस करते हुए नए नियमों पर बाजार को चलने के लिए मजबूर कर सकता है, उसे समझने के लिए मुकेश अंबानी की तरफ से की गई घोषणाओं को समझने की जरूरत है.

स्मार्टफोन डेटा को लेकर भारतीय बाजार में मौजूद सभी टेलीकॉम कंपनियां (सूचीबद्ध और गैर सूचीबद्ध दोनों) के बीच एक तरह की सहमति रही हैं और उनके बीच दरों को लेकर कभी कोई प्रतिस्पर्धा नहीं हुई. नतीजा, उपभोक्ताओं को महंगे प्लान खरीदना पड़ता था. 

लिस्टेड कंपनियों में भारती एयरटेल, आइडिया, रिलायंस कम्युनिकेशन और बीएसएनएल और गैर लिस्टेड कंपनियों में वोडाफोन अपने ग्राहकों से एक जीबी 3जी डेटा के लिए करीब 250 रुपये से अधिक रकम वसूलती हैं. 

बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के बावजूद इन कंपनियों के बीच कभी दरों को लेकर प्रतिस्पर्धा नहीं हुई. लेकिन रिलायंस जियो ने महज 50 रुपये में एक जीबी डेटा की पेशकश कर प्राइस वॉर का आगाज कर दिया है. यानी उपभोक्ताओं को अब 500 फीसदी सस्ती कीमत में डेटा मिलेगा.

रिलायंस जियो ने महज 50 रुपये में एक जीबी डेटा की पेशकश कर प्राइस वॉर का आगाज कर दिया है.

फिलहाल जियो दिसंबर 2016 तक डेटा फ्री में दे रही है. कंपनी का मकसद मौजूदा कंपनियों के उपभोक्ताओं को अपनी तरफ लाने का है और पिछले कुछ हफ्तों के दौरान रिलांयस डिजिटल स्टोर पर जियो के सिम के लिए लगी लंबी भीड़ को देखकर यह कहा जा सकता है कि कंपनी बाजार में मौजूद टेलीकॉम कंपनियों के उपभोक्ताओं को तोड़ने में सफल रही है. 

आने वाले दिनों में कंपनी को और अधिक उपभोक्ताओं के जुड़ने की उम्मीद है और इस संभावना के तहत रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने बैकएंड पर अपनी तैयारी भी पूरी कर रखी है.

अंबानी ने रिलायंस जियो की सेवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को समर्पित किया. तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के बावजूद भारत में मोबाइल ब्रॉडबैंड की सीमित पहुंच का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के 230 देशों में मोबाइल ब्रॉडबैंड के मामले में भारत की रैंकिंग 155 है. अंबानी ने कहा कि जियो की सेवा शुरू होने के बाद भारत की रैंकिंग टॉप 10 में पहुंच जाएगी.

भारत की रैंकिंग में सुधार में कितना वक्त लगेगा, यह बताना मुश्किल है लेकिन यह तय है कि डेटा मार्केट में जियो ने बने बनाए नियमों को बदल दिया है. जियो की सस्ती योजना से न केवल मोबाइल इंटरनेट का विस्तार होगा बल्कि डेटा की खपत में उम्मीद से अधिक की बढ़ोतरी होगी.

बर्बाद हुए एयरटेल और आइडिया के निवेशक

उपभोक्ता संख्या के आधार पर देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने कुछ दिनों पहले ही दरों में कटौती किए जाने की घोषणा की थी. लेकिन कंपनी को इसका कोई फायदा मिलता नहीं दिख रहा है.

जियो किस कदर मौजूदा टेलीकॉम कंपनियों के लिए विनाशक साबित होने जा रही है, इसकी पहली झलक आज देखने को मिली. 

उपभोक्ता संख्या के आधार पर भारतीय बाजार की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारतीय एयरटेल के शेयर 6.37 फीसदी की जबरदस्त गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं आइडिया सेल्युलर ने निवेशकों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया. बीएसई में कंपनी के शेयर 10.48 फीसदी तक टूट गए.

रिलायंस ग्रुप की प्रतिस्पर्धी और 90 के दशक में मोबाइल क्रांति की जनक रही रिलायंस कम्युनिकेशन का शेयर बीएसई में 8.81 फीसदी तक टूट गया. 

उपभोक्ता संख्या के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशन भारत की चौथी बड़ी कंपनी है. भारती एयरटेल में जहां निवेशकों का करीब 12,000 करोड़ रुपया डूब गया वहीं आइडिया सेल्युर ने निवेशकों के 2,800 करोड़ रुपये डुबो दिए. वोडाफोन अभी भारतीय बाजार में सूचीबद्ध नहीं है.

बीएसई का टेलीकॉम इंडेक्स 5.67 फीसदी की गिरावट के साथ 1156.58 पर बंद हुआ. टाटा कम्युनिकेशन के शेयरों में भी 2.78 फीसदी की गिरावट आई.

भारती एयरटेल में जहां निवेशकों का 12,000 करोड़ रुपया डूब गया वहीं आइडिया ने निवेशकों के 2,800 करोड़ डुबो दिए.

भारतीय एयरटेल को होने वाले सर्वाधिक नुकसान की सबसे बड़ी वजह जियो की वह घोषणा है जिसके तहत कंपनी ने अब डेटा और वॉयस कॉल के लिए अलग-अलग दर वसूले जाने की रवायत को खत्म कर दिया है.

अभी तक ग्राहकों को डेटा पैक और बातचीत के लिए अलग पैक खरीदने पड़ते थे लेकिन अब जियो ने साफ कर दिया है कि वह अपने उपभोक्ताओं से केवल डेटा के लिए पैसे लेगी और उन्हें मुफ्त में कॉलिंग की सेवा दी जाएगी. साथ की कंपनी ने रोमिंग को पूरी तरह से मुफ्त कर दिया है. एयरटेल के लिए कहीं से भी अच्छी खबर नहीं है.

आने वाले दिनों में बाजार में बने रहने के लिए मौजूदा टेलीकॉम कंपनियों को कई सस्ती घोषणाएं करनी पड़ेंगी, वरना उनके उपभोक्ता आधार के टूटने में देर नहीं होगी. 

एयरटेल के अलावा अभी तक किसी अन्य कंपनी ने डेटा और वॉयस दरों को सस्ता किए जाने की घोषणा नहीं की है. शायद वह जियो की आधिकारिक लॉन्चिंग का इंतजार कर रहे थे.

मौजूदा टेलीकॉम कंपनियों को बाजार में बने रहने के लिए अपनी रणनीति को फिर से तैयार करना होगा. देखना दिलचस्प होगा कि वह आने वाले दिनों में किस तरह की घोषणाएं करती हैं.

जियो की सभी सेवाएं दिसंबर 2016 तक मुफ्त दी जा रही हैं. जनवरी 2017 से वह उपभोक्ताओं के लिए सस्ते दर पर चार्ज लेना शुरू करेगी. ऐसे में अन्य कंपनियों के लिए चार महीनों का समय बचता है. अन्य कंपनियों के पास जियो से मुकाबले के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करने का काफी वक्त होगा. हालांकि जियो ने जिस तैयारी के साथ अगले साल के लिए अन्य योजनाओं की घोषणा की है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अन्य टेलीकॉम कंपनियों के पास उतना भी समय नहीं है.

अंबानी ने कहा, 'हम क भी कभार डेटा का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए प्रतिदिन 19 रुपये का पैैकेज ला रहे हैं. इसके बाद कम डेटा का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 149 रुपये का पैकेज होगा. वहीं बहुत अधिक डेटा का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए प्रति महीने 4,999 रुपये का पैकेज होगा.' 

अंबानी ने कहा कि वह दुनिया में सबसे कम कीमत पर 4जी मुहैया करा रहे हैं. जियो की योजना देश भर में वाई-फाई स्पॉट मुहैया कराने की भी है. उन्होंने कहा, 'अगले साल के मध्य तक देश भर में 10 लाख वाई-फाई स्पॉट होंगे.'

रिलायंस अपनी रणनीति को पूरा करने के लिए टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर पूरी तैयारी कर चुकी है.

फिर क्यों टूटे रिलायंस के शेयर?

जियो इन्फोकॉम रिलायंस इंडस्ट्रीज की अब तक की सबसे बड़ी स्टार्टअप है. जब मुकेश अंबानी कंपनी के एजीएम में देश के सबसे बड़े डिजिटल वॉर का आगाज कर रहे थे तब प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम कंपनियों में निवेशकों का पैसा डूब रहा था. 

हालांकि उसी वक्त रिलायंस के शेयर भी टूट रहे थे. बीएसई में रिलायंस इंडस्ट्र्रीज का शेयर 2.79 फीसदी की गिरावट के साथ 1029.15 रुपये पर बंद हुआ.

इसकी सबसे बड़ी वजह रिलायंस जियो इन्फोकॉम का विनाशकारी मॉडल है. जियो की लॉन्चिंग से निश्चित तौर पर एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और रिलायंस कम्युनिकेशन समेत अन्य कंपनियों को नुकसान होगा लेकिन फिलहाल रिलायंस को भी निकट भविष्य में कोई फायदा नहीं होगा.

रिलायंस जियो इन्फोकॉम के लिए राजस्व का मॉडल और मुनाफा सबसे बड़ा सवाल है और बाजार के पास इसका कोई जवाब नहीं है.

भारत का टेलीकॉम बाजार पहले से ही दबाव में है. सुप्रीम कोर्ट के 122 टेलीकॉम लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद फिर से हुई नीलामी में कंपनियों को ज्यादा कीमत में स्पेक्ट्रम की खरीदारी करनी पड़ी और इससे उनके राजस्व पर असर हुआ. अब रिलायंस ने जिस तरह से मुफ्त और सस्ती सेवाओं की घोषणा की है, उससे आने  वाले दिनों में इंडस्ट्री की सेहत में कोई सुधार होने की संभावना कम ही है. उल्टा अन्य कंपनियों के रेवेन्यू पर दबाव ही बढ़ेगा. 

दूसरा ए पी शाह आयोग की रिपोर्ट का सामने आना है जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए बुरी खबर है. शाह आयोग पिछले सात सालों के दौरान ओएनजीसी के कुएं से गैस निकालने के मामले में रिलायंस इंडस्ट्र्रीज से मुआवजा लिए जाने की सिफारिश की है.

First published: 2 September 2016, 7:12 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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