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क्या देश के पेट्रोल पंपों पर भी अब अंबानी-अडानी का कब्ज़ा होने जा रहा है ?

सुनील रावत | Updated on: 23 October 2018, 12:23 IST

गौतम अडानी और फ्रांस की दिग्गज कंपनी टोटल के बाद अब ब्रिटिश तेल कंपनी बीपी पीएलसी और मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) अगले तीन वर्षों में भारत में 2,000 पेट्रोल पंप स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. इससे जुड़े लोगों का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में इस पर तस्वीर और भी साफ हो जाएगी. रिलायंस पहले ही स्वतंत्र रूप से देश में तकरीबन 1,343 पेट्रोल पंप चलाती है.

बीपी को अक्टूबर 2016 में भारत में 3,500 ईंधन खुदरा दुकानों की स्थापना के लिए लाइसेंस मिला है. गौरतलब है भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल बाजारों में से एक है और भारत में वर्तमान में पेट्रोल डीजल की कीमत लगातार आसमान छू रही है. इसलिए विदेशी कंपनियां भारत को लगातार बाजार के रूप में देख रही हैं. इससे पहले अडानी ग्रुप और टोटल द्वार देश में अगले 10 साल में 1500 पेट्रोल पंप शुरू करने की खबर आयी थी.

वर्तमान में देश में सरकारी तेल कंपनियों का ही प्रभुत्व है लेकिन अब निजी कंपनियां भी अपने कदम जमा रही हैं. ब्रिटिश कम्पनी बीपी देश में अपनी खोज और उत्पादन उद्यमों में आरआईएल का भागीदार है. फरवरी 2011 में लंदन स्थित बीपी ने आरआईएल द्वारा 7.2 अरब डॉलर के लिए संचालित 21 तेल और गैस उत्पादन-साझा अनुबंधों में 30 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी. जबकि दोनों भारत गैस सॉल्यूशंस प्राइवेट में भागीदार भी हैं.

पिछले हफ्ते भारत की अपनी यात्रा पर आये बीपी के समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बॉब डडले ने कहा, "रिलायंस के साथ हमारी साझेदारी बहुत बढ़िया है, हमें खुदरा बिक्री के साथ सही तरह की शर्तों को प्राप्त करना है" गौरतलब है कि भारत में खुदरा ऑटो ईंधन के लिए लाइसेंस प्राप्त करने के लिए एक कंपनी को गैस या उत्पाद पाइपलाइन, या टर्मिनल में न्यूनतम 2,000 करोड़ का निवेश करना आवश्यक है. आरआईएल के पास भारत में 5,000 पेट्रोल पंप खोलने के लिए लाइसेंस हैं और ईंधन खुदरा सेगमेंट में अपने बाजार हिस्सेदारी को दोगुना करने की योजना है. जबकि वर्तमान में भारत के ईंधन खुदरा बाजार में 6% हिस्सा है.

 

आरआईएल और बीपी देश के कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर अपने पेट्रोल पंप खोलने की योजना बना रहे है. देश में ईंधन मांग को देखते हुए रिलायंस खुदरा कारोबार के बारे में आशावादी है.सितंबर तिमाही के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज ने डीजल और पेट्रोल की बिक्री में सालाना 10 फीसदी और 19 फीसदी की वृद्धि दर्ज की थी. 2005 में ईंधन खुदरा बिक्री में 12 फीसदी बाजार हिस्सेदारी रखने वाले आरआईएल ने 2014 में अपने बाजार हिस्सेदारी में 0.5 फीसदी से भी कम की गिरावट दर्ज की थी, जब बिक्री के बाद इसके अधिकांश पेट्रोल पंप बंद हो गए थे क्योंकि यह सब्सिडी वाले मूल्य पर सरकारी कंपनियों की कीमत पर पेट्रोल नहीं बेच सका. आरआईएल ने 2004 और 2006 के बीच 1,470 खुदरा दुकानों की स्थापना में 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए थे.

सरकारी स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉर्प लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने सरकारी सब्सिडी के कारण उत्पादन लागत से नीचे ईंधन बेचने में कामयाब रहे. लेकिन सरकार ने क्रमशः जून 2010 और अक्टूबर 2014 में पेट्रोल की कीमतों और डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के बाद, आरआईएल ने अपनी खुदरा दुकानों को फिर से खोलना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे अपने बाजार हिस्सेदारी को लगभग 5 फीसदी तक बढ़ा दिया. विश्लेषकों के मुताबिक रिलायंस और एस्सार ऑयल और शैल इंडिया के पास ईंधन खुदरा बाजार का 10 फीसदी हिस्सा है.

हालांकि सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती करने के लिए 2.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की. इसमें 1.50 रुपये पेट्रोल -डीजल की कीमत कंपनियों को कम करने के लिए कहा कहा गया. जैसा कि डडली ने कहा, "मुझे लगता है कि मूल्य नियंत्रण एक ऐसी चीज है जो लंबे समय तक इस क्षेत्र के लिए अच्छा नहीं होगा." भारत में 57,312 पेट्रोल पंप हैं और इंडियन ऑइल, बीपीसीएल और एचपीसीएल अगले चार वर्षों में लगभग 50,000 ईंधन आउटलेट जोड़कर अपने नेटवर्क का विस्तार करने के लिए तैयार हैं.

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First published: 23 October 2018, 12:23 IST
 
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