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जियो इफेक्ट: टेलीकॉम मार्केट में तेज़ हुई एकीकरण की गति

अभिषेक पराशर | Updated on: 16 September 2016, 8:03 IST
QUICK PILL
  • मोबाइल डेटा मार्केट में रिलायंस जियो की दखल के बाद उम्मीद के मुताबिक भारत के टेलीकॉम मार्केट में एकीकरण की शुरुआत हो गई है. 
  • उपभोक्ता संख्या के आधार टेलीकॉम मार्केट की चौथी बड़ी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) ने टेलीकॉम ऑपरेट एयरसेल के अधिग्रहण की घोषणा कर दी है. एयरसेल बाजार में लिस्टेड नहीं है. 
  • उम्मीद के मुताबिक ही भारतीय टेलीकॉम मार्केट में एकीकरण की शुरुआत हुई है. लेकिन जियो से मिलने वाली चुनौती दोतरफा है. पहला जियो ने डेटा मार्केट को लक्ष्य बनाया है जबकि मौजूदा कंपनियों के राजस्व का बड़ा स्रोत अभी भी वॉयस कॉल बिजनेस है. 
  • वहीं कंपनी ने 4जी हैंडसेट को भी बाजार में उतारा है. उपभोक्ता संख्या आधार पर देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों फिलहाल इस बिजनेस दूर हैं.

मोबाइल डेटा मार्केट में रिलायंस जियो की दखल के बाद उम्मीद के मुताबिक भारत के टेलीकॉम मार्केट में एकीकरण की शुरुआत हो गई है. 

उपभोक्ता संख्या के आधार टेलीकॉम मार्केट की चौथी बड़ी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) ने टेलीकॉम ऑपरेट एयरसेल के अधिग्रहण की घोषणा कर दी है. एयरसेल बाजार में लिस्टेड नहीं है. 

आरकॉम के अधिग्रहण की घोषणा के बाद बीसई में कंपनी के शेयरों में करीब 3 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है. साथ ही टेलीकॉम इंडेक्स में कोई बड़ी हलचल नहीं देखने को मिली. बीएसई टेलीकॉम इंडेक्स में महज 4 अंकों की मजबूती रही. 

जियो के लॉन्च के बाद रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा था कि जियो के बाजार में आने से न केवल मौजूदा टेलीकॉम कंपनियों को नुकसान होगा बल्कि बाजार में एकीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी. 

रिलायंस जियो ने बेहद सस्ते डेटा टैरिफ और मुफ्त वॉयस कॉल के ऑफर के साथ 4जी टेक्नोलॉजी को बाजार में उतारा है. फिच ने उम्मीद जताई थी कि भारत के टेलीकॉम मार्केट के एकीकरण के बाद पांच से छह बड़ी कंपनियां ही बाजार में बची रहेंगी.

रिलायंस कम्युनिकेशन के एयरसेल की अधिग्रहण की घोषणा के बाद बाजार में एकीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. रिलायंस कम्युनिकेशन अनिल धीरुभाई अंबानी समूह की कंपनी है जिसका मालिकाना हक अनिल अंबानी के पास है. 

मुकेश अंबानी के 4जी मार्केट में दखल देने के बाद रिलायंस कम्युनिकेशन ने अपनी स्थिति को मजबूत करने की रणनीति के तहत न केवल एयरसेल का अधिग्रहण करने जा रही है बल्कि उसकी योजना 25 फीसदी हिस्सेदारी को बेचकर करीब 6,000 करोड़ रुपये जुटाने की भी है. 

खबरों के मुताबिक कंपनी ने अपनी हिस्सेदारी बेचे जाने को लेकर रूस की सिस्तेमा से बातचीत शुरू कर दी है. आरकॉम में सिस्तेमा टेलीकॉम की 10 फीसदी हिस्स्सेदारी है. 

अधिग्रहण के बाद बनने वाली नई कंपनी में मौजूदा दोनों कंपनियों को अपनी हिस्सेदारी घटानी होगी. सिस्तेमा की मंजूरी के बाद रिलायंस कम्युनिकेशन और एयरसेल उसी अनुपात में अपनी हिस्सेदारी घटाने के बारे में फैसला करेंगी.

रेटिंग एजेंसी फिच ने जियो के बाजार में आने के बाद मौजूदा टेलीकॉम कंपनियों के एकीकरण की उम्मीद जताई थी.

रिलायंस ग्रुप की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, 'हम अपने सहयोगी मैक्सिस कम्युनिकेशन बीएचडी (एमसीबी) के साथ भारतीय टेलीकॉम मार्केट में एकीकरण की शुरुआत करने जा रहे हैं.' 

मैक्सिस कम्युनिकेशन बीएचडी एयरसेल की प्रोमोटर कंपनी है. रलायंस कम्युनिकेशन का बोर्ड इस सौदे को अपनी मंजूरी दे चुका है. खबरों के  मुताबिक दोनों कंपनियां इस सौदे को लेकर पिछले महीने अक्टूबर से ही बातचीत कर रही थीं.

अधिग्रहण के बाद बनने वाली नई कंपनी में दोनों कंपनियों की हिस्सेदारी आधी आधी होगी. नई कंपनी के नाम के बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है. 

एकीकरण के बाद बनेगी बड़ी कंपनी

आरकॉम और एयरसेल के बाद बनने वाली नई कंपनी निजी क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी कंपनी होगी जिसकी कुल संपत्ति 65,000 करोड़ रुपये होगी. नई कंपनी को रिलायंस जियो इन्फोकॉम  के 4जी नेटवर्क का लाभ होगा जिसकी कमान अनिल अंबानी के बड़े भाई मुकेश अंबानी के पास है.

दोनों कंपनियों के बीच पहले से ही स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग और शेयरिंग को लेकर समझौता हो चुका है. नई कंपनी में आरकॉम अपने 20,000 करोड़ रुपये के कर्ज को ट्रांसफर करेगी. इसमें से 14,000 करोड़ रुपया लॉन्ग टर्म का होगा जबकि 6,000 करोड़ रुपये का कर्ज किस्त में भरा जाने वाला होगा जिसका भुगतान कंपनी को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन को करना है. कंपनी यह भुगतान स्पेक्ट्रम की खरीदारी के एवज में करेगी.

वहीं एयरसेल अपना 14,000 करोड़ रुपये का कर्ज नई कंपनी को ट्रांसफ र करेगी. इस साल की शुरुआत में एयरसेल ने अपना 4जी स्पेक्ट्रम भारती एयरटेल को बेचकर 3,500 करोड़ रुपये जुटाए थे जिसका भुगतान उसने कर्ज का चुकाने में किया था.

नई कंपनी के पास उपभोक्ताओं की अनुमानित संख्या करीब 18 करोड़ होगी जबकि बाजार हिस्सेदारी 6 फीसदी के करीब होगी. 

मैक्सिस के प्रवक्ता की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, 'यह डील एमसीबी की भारतीय बाजार की प्रतिबद्धता को जाहिर करता है. 2006 में एयरसेल का अधिग्रहण करने के बाद एमसीबी ने एयरसेल में 35,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था जो कि भारत में सबसे बड़े विदेशी निवेश था.'

जून तिमाही में आरकॉम को 54 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो पिछली तिमाही के मुकाबले 6.3 फीसदी अधिक था. वहीं कंपनी के राजस्व में करीब 4 फीसदी की गिरावट आई थी.

जियो के बाद बदलने लगा बाजार

फिच ने कहा था कि जियो के बाजार में आने से वैसे समय में प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी होगी जब कंपनियों को बाजार में बने रहने के लिए पूंजीगत खर्च में इजाफा करना होगा क्योंकि बाजार में जल्द ही बड़े पैमाने पर 4जी हैंडसेट उपलब्ध होंगे. 

जियो के आने के बाद बाजार में मौजूद अन्य कंपनियों पर टैरिफ को कम करने का दबाव बढ़ गया है. आरकॉम और एयरसेल दोनों ही वॉयस के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां हैं जबकि जियो शुद्ध रूप से डेटा के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी है.

जियो ने साफ कर दिया है कि वह अपने उपभोक्ताओं से केवल डेटा के लिए पैसे लेगी न कि वॉरूस कॉल के लिए. इस लिहाज से इन दोनों कंपनियों को जियो से टक्कर लेने के लिए डेटा ऑपरेशन में बढ़ोतरी करनी होगी जिसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा.

एकीकरण के बाद भी होंगी मुश्किलें

दरअसल रिलायंस जियो ने अपने डेटा पैक के साथ मोबाइल हैंडसेट को भी बाजार में उतारा है जो केवल डेटा देने वाली टेलीकॉम कंपनियों के लिए चुनौती बना हुआ है. 

फिच के अनुमान के मुताबिक जियो के डेटा की कीमत मौजूदा कंपनियों के डेटा पैक के मुकाबले करीब 20 से 25 फीसदी सस्ता है. साथ ही कंपनी वॉयस कॉल और मैसेज सर्विसेज के लिए कोई पैसा नहीं ले रही है. 

जियो ने अपनी सेवा दिसंबर 2016 तक मुफ्त रखी है. साथ ही दिसंबर 2017 तक कंपनी ने 300 लाइव टीवी स्टेशंस और डिमांड पर मूवी, म्यूजिक और अन्य सेवाओं को मुफ्त रखा है. उपभोक्ताओं की संख्या के आधार पर सबसे बड़ी कंपनी एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और रिलायंस कम्युनिकेशन जैसी कंपनियों के सामने अब बड़ी चुनौती अपने मौजूदा उपभोक्ताओं को जोड़े रखने की है. 

2006 में एयरसेल का अधिग्रहण करने के बाद एमसीबी ने एयरसेल में 35,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था.

ऐसे में रिलायंस कम्युनिकेशन और एयरसेल के विलय के बाद भी टेलीकॉम मार्केट में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. 

रिपोर्ट बताती है कि आने वाले दिनों में अन्य  टेलीकॉम कंपनियों की दरों में 10 से 15 फीसदी की गिरावट आ सकती है.

अभी तक प्रति यूजर्स डेटा से मिलने वाले राजस्व की दर (एआरपीयू) बहुत कम रही है लेकिन जियो के आने के बाद इस राजस्व में बढ़ोतरी होने की संभावना है. रिपोर्ट बताती है कि जियो का टैरिफ प्लान ''केवल डेटा प्लान'' के मार्केट को मजबूत करेगा.

जियो का यह मॉडल मौजूदा टेलीकॉम मार्केट के लिए कितना खतरनाक होगा, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय बाजार में काम कर रही टेलीकॉम कंपनियों के राजस्व का सबसे बड़ा हिस्सा और उनका मुनाफा वॉयस और मैसेज सर्विसेज से आता है. 

फिच की रिपोर्ट के मुताबिक देश की चारों बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के औसत ऑपरेटिंग एबिटा मार्जिन में अगले साल 200-250 आधार अंकों की गिरावट देखने को मिल सकती है. 2015 में इन कंपनियों का मार्जिन 35 फीसदी रहा है.

उम्मीद के मुताबिक ही भारतीय टेलीकॉम मार्केट में एकीकरण की शुरुआत हुई है. लेकिन जियो से मिलने वाली चुनौती दोतरफा है. पहला जियो ने डेटा मार्केट को लक्ष्य बनाया है जबकि मौजूदा कंपनियों के राजस्व का बड़ा स्रोत अभी भी वॉयस कॉल बिजनेस है. वहीं कंपनी ने 4जी हैंडसेट को भी बाजार में उतारा है. उपभोक्ता संख्या आधार पर देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों फिलहाल इस बिजनेस दूर हैं.

अन्य कंपनियों ने रिलायंस जियो के बाजार में सामने आने के बाद अपनी रणनीति को आगे बढ़ाना शुरू किया है. मसलन तात्कालिक तौर पर कंपनियां टैरिफ प्लान की कीमतों में कटौती और लंबे समय के लिए  अधिग्रहण और विलय जैसे फैसले ले रही हैं. जबकि रिलायंस जियो इन्फोकॉम टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे अपनी तैयारी पहले ही पूरी कर चुका है.

साथ ही रियालंस जियो इन्फोकॉम के पीछे रिलायंस इंडस्ट्रीज खड़ी है जिसके पास करीब 93,000 करोड़ रुपये का नकदी है. अन्य कंपनियों को पूंजीगत जरूरतों और ऑपरेशन बढ़ाने के लिए बाजार से पूंजी जुटाने में भी मशक्कत करनी होगी, जबकि जियो को इस मोर्चे पर फिलहाल किसी तरह की दिक्कतों का सामना नहीं करना होगा.

First published: 16 September 2016, 8:03 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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