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मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज पेट्रोल- डीजल कारोबार में जमा रही है अपने कदम

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 April 2019, 12:16 IST

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने अपने ईंधन रिटेल आउटलेट्स को बंद करने के ग्यारह साल बाद एक बार फिर से 2006 से पहले के स्तर तक पेट्रोल और डीजल में बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है. जबकि पेट्रोल और डीजल की बिक्री एक साल पहले 2018-19 में क्रमशः 9% और 3% बढ़ी है.  2006 तक जब आरआईएल की ईंधन की बिक्री अपने चरम पर थी, रिफाइनरी की बाजार हिस्सेदारी 14.3% और डीजल की 7.2% थी.

प्रेजेंटेशन में आरआईएल ने कहा, "1,372 आउटलेट्स के साथ, हमने मार्च 2019 में सबसे ज्यादा एग्जिट वॉल्यूम 5.6 मिलियन किलोलीटर पर देखा. एक किलोलीटर 1,000 लीटर के बराबर होता है. आरआईएल ने 2006 तक ईंधन खुदरा बिक्री में 12% बाजार हिस्सेदारी हासिल की थी. उसने 2014 में 0.5% से भी कम की गिरावट देखी, जब उसने कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण अपने अधिकांश ईंधन खुदरा दुकानों को बंद कर दिया था.

 

आरआईएल ने 2004 से 2006 के बीच 1,470 रिटेल आउटलेट स्थापित करने में 5,000 करोड़ खर्च किए. 2008 में आरआईएल ने आउटलेट बंद करना शुरू कर दिया और बाद में उनमें से कुछ को फिर से खोल दिया. 2018-19 में रिलायंस ने 59 स्टेशनों को फिर से खोला, जो 1,372 ईंधन खुदरा दुकानों तक पहुंच गया.जबकि रिलायंस के पास 5,000 ईंधन रिटेल आउटलेट स्थापित करने का लाइसेंस है, बीपी के पास भारत में 3,500 ईंधन रिटेल आउटलेट स्थापित करने का लाइसेंस है.

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First published: 24 April 2019, 12:11 IST
 
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