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अंबानी ब्रदर्स में नहीं हुआ ये सौदा तो मुश्किल में पड़ सकते हैं देशभर के Jio ग्राहक

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 December 2018, 11:08 IST

रिलायंस जियो इन्फोकॉम के ग्राहकों को दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख बाजारों में सेवाओं में व्यवधान का सामना करना पड़ सकता है. एक रिपोर्ट की माने तो यदि जियो रिलायंस कम्युनिकेशंस से स्पेक्ट्रम खरीदने में सफल नहीं हो पाती है और अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली आरकॉम इन्सॉल्वेंसी की ओर जाती है तो जियो की सेवाएं इससे प्रभावित हो सकती है.

टेलीकॉम एक्सपर्ट का मानना है चूंकि मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली टेलीकॉम कंपनी प्रीमियम 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में पांच इकाइयों का स्पेक्ट्रम ब्लॉक बनाने के लिए आरकॉम पर निर्भर है. जानकारों के के अनुसार जियो की 4जी एलटीई सेवाओं के लिए इसकी आवश्यकता है. प्रमुख बाजार जो इसमें शामिल हैं उनमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल हैं. इनमें से प्रत्येक सर्कल में Jio 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में 3.8 यूनिट 4जी एयरवेव रखती है, और निर्बाध एलटीई कवरेज के लिए उसी बैंड में आरकॉम के स्पेक्ट्रम पर निर्भर है.

एक्सपर्ट का कहना है कि "यह महत्वपूर्ण है कि स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग सौदा जल्द ही साफ हो जाना आवश्यक है क्योंकि यह Jio को RCom के 4G स्पेक्ट्रम तक पहुंच प्रदान करेगा जो 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में ब्लॉक बनाने में मदद करता है. यह प्रमुख बाजारों में सेवा अवरोधों से बचने के लिए LTE कवरेज के लिए बिल्कुल आवश्यक है.

स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग समझौते को 2017 के अंत में शुरू किया गया था, जिसे अगर मंजूरी दे दी गई, तो आरकॉम Jio को 800 मेगाहर्ट्ज बैंड एलटीई स्पेक्ट्रम सहित 122 एयरवेज की 122.4 यूनिट बेच पायेगा. गौरतलब है कि यह सौदा आरकॉम के लिए भी आवश्यक है क्योंकि वह 46,000 करोड़ रुपये कर्ज से दबा हुआ है. अगर यह सौदा हो जाता है तो अनिल अंबानी की कंपनी को कर्ज में 18,000 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी.

साथ ही जो अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली टेलीकॉम को इनसॉल्वेंसी कार्यवाही से दूर रखने में मदद करेगा. Jio के लिए भी यह महत्वपूर्ण है, अन्यथा इसके 4 जी एलटीई कवरेज की समग्र गुणवत्ता मुंबई, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, असम और पूर्वोत्तर जैसे अन्य प्रमुख बाजारों में भी प्रभावित हो सकती है.

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First published: 24 December 2018, 11:06 IST
 
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