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अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के खिलाफ इंटरनेशनल अदालत में केंद्र सरकार हारी केस

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 August 2018, 11:21 IST

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और राज्य के स्वामित्व वाली ओएनजीसी के बीच लम्बे समय से चल रहे गैस विवाद में सरकार को एक बड़े झटका लगा है. मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले समूह के पक्ष में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने मंगलवार में फैसला सुनाया है.

ट्रिब्यूनल ने कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन में ओएनजीसी के साथ लगे ब्लॉक से अवैध गैस उत्पादन के सरकार के दावे को कंसोर्टियम ने खारिज कर दिया. आर्बिट्रेशन पैनल के फैसले के बाद रिलायंस, बीपी और निको को सरकार को 1.55 अरब डॉलर का भुगतान नहीं करना होगा.

क्या था पूरा विवाद

देश की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी ओएनजीसी ने 2013 में रिलायंस इंडस्ट्रीज पर आरोप लगाया था कि उसने ओएनजीसी के गैस फील्ड के पास अपना गैस प्लांट लगाकर उसके गैस फील्ड से गैस चुराई है. जबकि रिलायंस का कहना था कि उन्होंने गैस ब्लॉक का काम पेट्रोलियम एंड गैस मिनिस्ट्री से अनुमति लेकर किया है. इस मामले की जांच करने वाली एजेंसी डगोलायर एंड मेकनॉटन ने कहा कि 31 मार्च 2015 तक रिलायंस ने इस ब्लॉक से 58.67 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस निकाली.

डीएंडएम ने पेट्रोलियम मिनिस्ट्री को अक्टूबर में सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ओएनजीसी के गैस ब्लॉक के बगल में बनाये गए रिलायंस इंडस्ट्री के ब्लॉक से ओएनजीसी कागैस उत्पादन न सिर्फ प्रभावित हुआ बल्कि गैस का लाभ रिलायंस को मिल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस के ब्लॉकों की मौजूदगी से ONGC का तकरीबन 11.12 घन मीटर गैस जिसकी कीमत तकरीबन 11,055 करोड़ है. जिसका प्रवाह रिलायंस के गैस ब्लॉक की तरफ हुआ है.

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First published: 1 August 2018, 11:21 IST
 
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