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खुलासा- GST में लाने से 75 रुपये लीटर तक आ सकते हैं पेट्रोल के दाम, सरकारों को इस वजह से लगता है डर

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 March 2021, 12:11 IST

 #PetrolDieselPrice देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत आसमान छू रही हैं. SBI इकोनॉमिस्ट का कहना है कि वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाए जाने पर देश भर में पेट्रोल की कीमत 75 रुपये लीटर तक नीचे जा सकती है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है. कहा गया है कि इससे डीजल 68 रुपये लीटर आ जायेगा लेकिन केंद्र और राज्यों को इससे एक लाख करोड़ या जीडीपी के 0.4 फीसदी का नुकसान होगा. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत 60 अमरीकी डालर और एक्सचेंज रेट 73 डॉलर पर यह अनुमान लगाया गया है. वर्तमान में प्रत्येक राज्य के पास तेल पर टैक्स लगाने का अपना तरीका है, जबकि केंद्र भी इसपर ड्यूटी और सेस लगाता है.

देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल की कीमत 100 प्रति लीटर तक पहुंच गई है. एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि जीएसटी के तहत पेट्रोल और डीजल लाना जीएसटी ढांचे का एक अधूरा एजेंडा है और नए अप्रत्यक्ष कर ढांचे के तहत कीमतों को प्राप्त करने में मदद मिल सकती है.


केंद्र और राज्य कच्चे तेल उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने के लिए तैयार इसलिए नहीं होते हैं क्योंकि पेट्रोलियम उत्पादों पर बिक्री कर / वैट उनके लिए स्वयं कर राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है. वर्तमान में, राज्य अपनी आवश्यकताओं के आधार पर वैट और अन्य टैक्स लगाते हैं.

अनुमान के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में 1 USD की बढ़ोतरी से पेट्रोल की कीमत में लगभग 50 पैसे और डीजल की कीमतों में लगभग 1.50 की बढ़ोतरी होगी. अगर सिस्टम जीएसटी में शिफ्ट हो जाता है, टैक्स रेवेन्यू में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी वाले राज्यों में सबसे ज्यादा नुकसान होगा. इस तरह के कदम से उपभोक्ताओं को 30 रुपये तक कम भुगतान करने में मदद मिलेगी.

दिलचस्प बात यह है कि जब कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल तक घट जाती है, तो केंद्र और राज्य 18,000 करोड़ के करीब बचा सकते हैं, अगर वे उपभोक्ताओं को लाभ दिए बिना पेट्रोल की कीमतों को आधारभूत कीमतों पर रखते हैं, 9,000 करोड़ की बचत कर सकते हैं.

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First published: 4 March 2021, 11:57 IST
 
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