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उल्टी पड़ी ईपीएफ पर कराधान की कोशिश

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 March 2016, 8:27 IST
QUICK PILL
  • मध्य वर्ग के दबाव और विपक्ष के संगठित विरोध को देखते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ईपीएफ पर प्रस्तावित टैक्स को वापस ले लिया है.
  • कहा जा रहा है कि जेटली ने यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दखल दिए जाने के बाद लिया. ईपीएफ पर कर लगाए जाने के फैसले का आरएसएस से जुड़े संगठन ने भी विरोध किया था.

मध्य वर्ग की तरफ से पड़ रहे दबाव के आगे घुटने टेकते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ईपीएफ पर लगे टैक्स को वापस ले लिया है. जेटली ने बजट के दौरान ईपीएफ की रकम के 60 फीसदी हिस्से पर निकासी के दौरान कर लगाए जाने का प्रस्ताव रखा था.

लोकसभा में जेटली ने कहा, 'लोगों से मिली प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार इस प्रस्ताव का समग्र तरीके से समीक्षा करना चाहेगी. इसलिए मैं इस प्रस्ताव को वापस लेता हूं.'

सरकार ने प्रॉविडेंट फंड में कर्मचारियों की तरफ से दिए जाने वाले अंशदान को भी टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया है

सरकार ने इसके साथ ही प्रॉविडेंट फंड में कर्मचारियों की तरफ से दिए जाने वाले अंशदान को भी टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया है. यह रकम 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष है. हालांकि नेशनल पेंशन स्कीम के 40 फीसदी हिस्से को टैक्स फ्री रखने का फैसला कायम रखा गया है. फिलहाल एनपीएस में पूरी रकम पर निकासी के दौरान टैक्स देना पड़ता है. एनपीएस में पैसा लगाने वालों के लिए यह एक बड़ी राहत है.

पीएमओ का फैसला

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक जेटली पूरी तरह से ईपीएफ में जमा रकम पर कर लगाने के पक्ष में थे लेकि न प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे वापस लेने का फैसला किया.

बजट के दिन जेटली ने ईपीएफ पर टैक्स लगाने की घोषणा की थी और इसके बाद सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना शुरू हो गई थी. सरकार ने बजट में छोटे करदताओं को किसी तरह की राहत नहीं दी थी.

बजट में ईपीएफ पर कर लगाए जाने के बाद ट्विटर पर ईपीएफ वापस लो का हैशटैग ट्रेंड करने लगा था. लोगों ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध जताया था.

बजट में ईपीएफ पर कर लगाए जाने के बाद ट्विटर पर ईपीएफ वापस लो का हैशटैग ट्रेंड करने लगा था

यहां तक की आरएसएस के भारतीय मजदूर संघ ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे पूरी तरह से वापस लिए जाने की मांग की थी.

वामपंथी दल समेत विपक्षी दलों ने इस फैसले के खिलाफ एक साथ मिलकर सरकार का विरोध किया था. ईपीएफ पर कर लगाए जाने के फैसले को वापस लिए जाने के बाद कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी ने इसका श्रेय खुद को दिया. गांधी ने कहा, 'मैंने सरकार से कहा था कि उन्हें वेतनभोगी वर्ग को दबाना नहीं चाहिए. सरकार की तरफ से इस फैसले को वापस लिया जाना सही फैसला है.'

गांधी ने कहा, 'जब कभी भी किसी व्यक्ति को सताया जाएगा या ऐसा करने की कोशिश की जाएगी मैं उनकी मदद करने की कोशिश करुंगा. मुझे लगा था कि सरकार के इस फैसले मध्य वर्ग और वेतनभोगी समुदाय को तकलीफ हुई है. इसलिए मैंने सरकार पर दबाव बनाया. मुझे खुशी है कि उन्हें कुछ राहत मिली है.'

सरकार के अनुमान के मुताबिक 3.7 करोड़ ईपीएफ सब्सक्राइबर्स में से कर का असर केवल 70 लाख लोगों पर ही पड़ता जिनकी आमदनी 15,000 रुपये से अधिक है.

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First published: 9 March 2016, 8:27 IST
 
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