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एसबीआई का एनपीए बढ़ा, मुनाफे में 66 फीसदी कमी

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 May 2016, 17:03 IST
(कैच न्यूज)

वित्त वर्ष 2016 की चौथी तिमाही में देश में सार्वजनिक क्षेत्र के शीर्ष बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का मुनाफा 66.21 फीसदी घटकर 1264 करोड़ रुपये हो गया है. गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) और खराब कर्ज के चलते यह पिछले साल की तिमाही के मुकाबले बड़ी गिरावट है.

वित्त वर्ष 15 की अंतिम तिमाही (जनवरी से मार्च) में बैक ने 3742.02 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था. इस साल  फंसे कर्ज की बढ़ती राशि के चलते सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को नुकसान हुआ है. बढ़ते घाटे के बीच 6 जून को वित्त मंत्री अरुण जेटली सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रमुखों के साथ बैठक करने वाले हैं.

इस बैठक का निर्णय तब लिया गया है जब वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही में इन सरकारी बैंकों को 21,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. अभी भी केनरा बैंक एवं कुछ अन्य बैंकों का वार्षिक परिणाम आना बाकी है.

क्या सहयोगी बैंकों के विलय से बदलेगी एसबीआई की किस्मत?

एसबीआई के तिमाही परिणामों के अनुसार पिछले साल 31 मार्च को बैंक का सकल एनपीए 56 हजार करोड़ रुपए था. 31 दिसंबर, 2015 को यह बढ़कर 72 हजार करोड़ रुपये और 31 मार्च, 2016 को 98 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

दूसरी ओर कुछ दिनों पहले ही लंबे समय तक चले मंथन के बाद एसबीआई ने अपने पांच सहयोगी बैंकों और नवगठित भारतीय महिला बैंक (बीएमबी) के खुद में विलय के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है.

एसबीआई के पांच सहयोगी बैंक में स्टेट बैंक आफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक आफ हैदराबाद, स्टेट बैंक आफ मैसूर, स्टेट बैंक आफ पटियाला और स्टेट बैंक आफ त्रावणकोर शामिल हैं.

आपको बता दें कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. उद्योग संगठन एसोचैम की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर 2015 के अंत तक जोखिम वाली परिसंपत्ति का आंकड़ा दस लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है. इसमें गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) और पुनर्गठित ऋण (सीडीआर) भी शामिल हैं.

First published: 27 May 2016, 17:03 IST
 
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