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इलेक्टोरल बांड पर सरकार से मिले निर्देश की जानकारी देने से SBI ने किया इनकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 June 2019, 17:23 IST

भारतीय स्टेट बैंक ने चुनावी बॉन्ड पर सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक से प्राप्त संचार (communication) का खुलासा करने से इनकार कर दिया है. एसबीआई ने पुणे स्थित एक्टिविस्ट विहार डुरवे द्वारा दायर एक राइट टू इंफॉर्मेशन (आरटीआई) आवेदन को ठुकरा दिया, जिन्होंने 2017 और 2019 के बीच आरबीआई या किसी भी सरकारी विभाग से प्राप्त पत्र, पत्राचार, निर्देश, अधिसूचना या ई-मेल की प्रतियां मांगी थीं.

बैंक ने कहा कि "आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता है, जिसका खुलासा करने में आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 8 (1) (ई) और 8 (1) (जे) के तहत छूट दी गई है. बैंक ने आरबीआई और सरकार से इस तरह के संचार पर किसी भी कार्रवाई का विवरण देने से इनकार कर दिया. एसबीआई के पास इलेक्टोरल बॉन्ड बेचने का विशेष अधिकार है, जिसका उपयोग राजनीतिक दलों को गुमनाम रूप से दान देने के लिए किया जाता है.

 

बिक्री तब एसबीआई शाखाओं में खुलती है जब वित्त मंत्रालय एक निश्चित अवधि के लिए उनकी बिक्री की अधिसूचना जारी करता है. 2018 में केंद्र द्वारा अधिसूचित चुनावी बॉन्ड की योजना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. बॉन्ड को उस व्यक्ति द्वारा खरीदा जा सकता है जो भारत का नागरिक है. बांड 15 दिनों के लिए वैध रहते हैं और केवल उस अवधि के भीतर अधिकृत बैंक के साथ एक खाते के माध्यम से एक पात्र राजनीतिक पार्टी द्वारा एन्कोड किया जा सकता है.

चुनावी सुधारों के क्षेत्र में काम करने वाले एक स्वैच्छिक समूह एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है, जबकि माकपा ने इसे अलग-अलग याचिकाओं में उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौती दी है.

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First published: 14 June 2019, 17:08 IST
 
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