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SBI की रिपोर्ट से सरकार की उडी नींद, कहा, तेजी से ख़त्म हो रहा बैंकों का कैश

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 March 2018, 15:34 IST

नोटबंदी के बाद जिस तरह सरकार ने करेंसी सर्कुलेशन पर नियंत्रण करने और डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने का दावा किया अब उस पर सवाल उठने लगे हैं. हालही में आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया था कि करेंसी सर्कुलेशन एक बार फिर से नोटबंदी से पहले के स्तर पर पहुँचने वाला है.

अब सरकार के लिए एक और चिंतिति करने वाली खबर एसबीआई की रिपोर्ट से सामने आयी है. सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दो महीनों में करेंसी सर्कुलेशन में जोरदार इजाफा हो रहा है. लोग बड़ी मात्रा में बैंकों से पैसे निकाल रहे हैं. जानकारों का कहना है कि इसका सीधा असर ब्याज दरों पर पड़ेगा. इसी कड़ी में पिछले हफ्ते ही एसबीआई, पीएनबी, आईसीआईसीआई जैसे बैंकों ने कर्ज महंगा कर दिया.

एसबीआई की रिपोर्ट की माने तो जनवरी में करेंसी सर्कुलेशन 45 हजार करोड़ रुपए बढ़ गया. जबकि फरवरी में यह बढ़कर 51 हजार करोड़ रुपए हो गया. औसतन करंसी सर्कुलेशन इन दो महीने में 10 हजार करोड़ रुपए से लेकर 20 हजार करोड़ रुपए तक बढ़ता सकता है.

माना जा रहा है कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक जैसे राज्यों में चुनाव के कारण सर्कुलेशन के और बढ़ने की संभावना है. बैंक अपने डिपॉजिट को रोकने के लिए डिपॉजिट रेट बढ़ा सकते हैं और लोन, ईएमआई पर भी इसका असर पड़ेगा.

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, 23 फरवरी को कुल 17.82 लाख करोड़ रुपये की करेंसी सर्कुलेशन में थी, जो नवंबर लागू की गई नोटबंदी से पहले 17.97 लाख करोड़ थी जो वर्तमान सर्कुलेशन नोटबंदी से पहले का 99.17% है.

First published: 10 March 2018, 15:31 IST
 
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