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सरकार की रिपोर्ट में आया सामने- 10 महीनों में 60 लाख से ज्यादा लोगों ने छोड़ी नौकरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 August 2018, 15:21 IST

शुक्रवार को सरकार द्वारा जारी किए गए पेरोल आंकड़ों के मुताबिक कम से कम 60 लाख लोग, जिनमे से 46 लाख 35 वर्ष से कम के हैं, ने जून के अंत तक 10 महीने में औपचारिक नौकरियां छोड़ीं. पेरोल डेटा अप्रैल में जारी किये जाने के बाद यह पहली बार है जब सरकार ने औपचारिक वर्कफाॅर्स छोड़ने वाले लोगों की संख्या जारी की है.

सरकार ने कहा कि सितंबर 2017 और जून 2018 के बीच 1 करोड़ 7 लाख कर्मचारी ईपीएफओ में शामिल हुए थे, कम से कम 60.4 लाख इसे सब्सक्राइब करना बंद कर दिया. सरकार ने हाल ही में औपचारिक नौकरी निर्माण या हानि की गणना के लिए ईपीएफओ डेटा को एक महत्वपूर्ण पैरामीटर के रूप में उपयोग किया है.

 

सरकार ने ईपीएफओ छोड़ने वाले बहुत से लोगों के लिए कारण स्पष्ट नहीं किया है. हालांकि ईपीएफओ को अपनी सदस्यता समाप्त करने वाले ऐसे लोगों की उम्र वर्गीकरण से पता चलता है कि उनमें से अधिकतर सेवानिवृत्ति की आयु के नहीं हैं.

भारत में नौकरियों की गणना करने के लिए कोई प्रमाणित प्रणाली नहीं है. ईपीएफओ डेटा कई मानकों में से एक है. तथ्य यह है कि अगर आप नए ग्राहकों को नई नौकरियों के रूप में बुलाते हैं तो आपको नौकरी के नुकसान के रूप में ईपीएफओ को सदस्यता समाप्त करना होगा. हालांकि अधिकारी ने कहा कि ऐसे कई कारक हैं जिनसे इसमें योगदान हो सकता है, जिसमें कपड़ा और निर्माण जैसे क्षेत्रों में संविदात्मक नौकरियां, मजदूरी मतभेदों के कारण औपचारिक से अनौपचारिक नौकरियों में परिवर्तन, और स्वचालन सहित कई कारकों के कारण छंटनी शामिल है.

भारत के श्रम बाजार के लिए नौकरियों की गुणवत्ता एक परेशानी का मुद्दा रहा है और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और विश्व बैंक समेत कई एजेंसियों ने भारत में गुणवत्ता की नौकरियों की सख्त जरूरतों के बारे में कहा है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के एक सहयोगी प्रोफेसर हिमांशु ने कहा कि नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि क्यों ईपीएफओ डेटा को सरकार द्वारा नौकरी निर्माण के के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह केवल सामाजिक सुरक्षा प्रावधान को इंगित करता है.

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First published: 25 August 2018, 15:21 IST
 
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