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Walmart-flipkart डील में अपने शेयरों को लेकर मुश्किल में फंसी सॉफ्टबैंक

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 May 2018, 16:18 IST

भारतीय ई-कॉमर्स कंपनी फ्लि‍पकार्ट ने वॉलमार्ट को अपनी 77 फीसदी हिस्‍सेदारी बेचने के बाद अब सवाल ये है कि फ्लि‍पकार्ट में सबसे बड़ा इन्‍वेस्‍टर सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प कब तक अपनी हि‍स्‍सेदारी वॉलमार्ट को बेचेगा. बता दें कि सॉफ्टबैंक की फ्लि‍पकार्ट में 20-22 फीसदी की हि‍स्‍सेदारी है.

वहीं इस मामले से जुड़े लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सॉफ्टबैंक के सीईओ मासायोशी सन अगले 7 से 10 दि‍न के भीतर इस बात का फैसला लेंगे कि‍ वह भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन रि‍टेलर से बाहर नि‍कलेंगे या कुछ और समय तक बने रहेंगे. गौरतलब है कि‍ बुधवार को वॉलमार्ट ने करीब 16 अरब डॉलर में फ्लि‍पकार्ट की 77 फीसदी हि‍स्‍सेदारी खरीदने का ऐलान कि‍या था.

टैक्‍स का है पूरा मामला

सूत्रों का कहना कि‍ सॉफ्टबैंक ने अभी तब फ्लि‍पकार्ट से बाहर नि‍कलने पर फैसला नहीं लि‍या है. वहीं सॉफ्टबैंक को अपनी हि‍स्‍सेदारी न बेचने का कारण टैक्‍स भी हो सकता है. जिसके तहत सॉफ्टबैंक को शेयर बेचने से होने वाले मुनाफे पर टैक्‍स देना होगा.

हालांकि‍, वॉलमार्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया कि‍ इन्‍वेस्‍टर्स के तौर पर फ्लि‍पकार्ट के को-फाउंडर बि‍न्‍नी बंसल, टेंसेंट होल्‍डिंग्‍स लि‍., टाइगर ग्‍लोबल मैनेजमेंट एलएलसी और माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प के पास बाकी 23 फीसदी हि‍स्‍सेदारी रहेगी, इसमें सॉफ्टबैंक ने अपने 20 से 22 फीसदी हि‍स्‍से को बेचने की मंजूरी अंतर्नि‍हि‍त है.

2 अरब डॉलर चुकाने पड़ेंगे सिर्फ टैक्‍स में

बता दें सॉफ्टबैंक का फ्लि‍पकार्ट में 2.5 अरब डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट है. जिसके तहत शेयर बेचने पर उसे कंपनी से करीब 4.5 अरब डॉलर तक मि‍लेंगे. ऐसे में भारतीय कानून के मुताबि‍क, 2 अरब डॉलर के मुनाफे पर टैक्‍स लगेगा. क्‍योंकि‍ शेयर्स से होने वाले मुनाफे को दो साल से ज्‍यादा के लि‍ए रखना पड़ता है. ऐसे में सॉफ्टबैंक को 20 फीसदी लॉन्‍ग टर्म कैपि‍टल गेन्‍स टैक्‍स के साथ सरचार्ज और एजुकेशन सेस भी देना होगा. इसकी वजह से कंपनी का एक चौथाई मुनाफा साफ हो जाएगा.

First published: 11 May 2018, 16:18 IST
 
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