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देश के सरकारी बैंकों को बड़ा झटका, घाटा तीन गुना बढ़कर हुआ 14,716 करोड़

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 November 2018, 9:48 IST

सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों का घाटा पिछले वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में बैड लोन बढ़ने के कारण साढ़े तीन गुना बढ़कर 14,716 करोड़ रुपये हो गया. 2017-18 की सितंबर तिमाही में इन 21 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने 4,284 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया गया था. हालांकि बैंकों का यह घाटा तिमाही आधार पर पिछली तिमाही (अप्रैल-जून) की तुलना में यह घाटा करीब 2000 करोड़ रुपये कम है.

परिणामों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में घोटाले प्रभावित पीएनबी को 4,532 करोड़ रुपये की घाटा व है जो सबसे अधिक ही. यह पिछली साल की समान अवधि में 561 करोड़ रुपये थी. भारत के दूसरे सबसे बड़े पीएसयू बैंक को इस साल मार्च तिमाही में करीब 14,000 करोड़ रुपये की भारी धोखाधड़ी का पता लगाने के बाद भारी नुकसान हुआ, कथित रूप से नीरव मोदी और उनके सहयोगियों ने बैंक को बड़ा नुकसान पहुंचाया.

 

बीते सितम्बर में बैंक का कुल एनपीए 7733 करोड़ रुपये था जबकि एक साल पहले यह 2964 करोड़ रुपये था. सितंबर तक बैंक का ग्रॉस एनपीए 17.16% रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 13.31% था. हालांकि, पिछली तिमाही में 18.26% की तुलना में ग्रॉस एनपीए में सुधार हुआ है.

हालही में केन्द्रीय सतर्कता आयोग ने कहा कि उसने शीर्ष 100 बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों का विश्लेषण पूरा कर लिया है और इसकी रिपोर्ट भारतीय रिज़र्व बैंक, प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो के साथ साझा की है.

केन्द्रीय सतर्कता आयोग ने कहा कि विश्लेषण में यह बात सामने आयी है कि जिस मॉडस ऑपरेंडी से अधिकतर फ्रॉड किये गए उन विसंगतियों और कमियों को भविष्य में रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाये जाने चाहिए.

विजिलेंस कमिश्नर टीएएम भसीन ने बताया कि 13 क्षेत्रों जेम्स और आभूषण, विनिर्माण और उद्योग, कृषि, मीडिया, विमानन, सर्विस एंड प्रोजेक्ट, चेक, व्यापार, सूचना प्रौद्योगिकी, निर्यात व्यापार, सावधि जमा और मांग ऋण क्षेत्रों मेंधोखाधड़ी का विश्लेषण किया गया था.

 

First published: 19 November 2018, 9:48 IST
 
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