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मोदी सरकार में इस अफसर की नियुक्ति पर उठे थे सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने दी क्लीन चिट

सुनील रावत | Updated on: 2 July 2018, 12:43 IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य सतर्कता आयुक्त के रूप में केवी चौधरी व सतर्कता आयुक्त के रूप में टीएम भसीन की नियुक्ति को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी केवी चौधरी और वीसी टीएम भसीन की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि हमें इस नियुक्ति को रोकने का कोई आधार नजर नहीं आता इसलिए नियुक्ति रद्द करने का कोई आधार नहीं है. चौधरी की नियुक्ति को लेकर एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि चौधरी व भसीन पर गंभीर आरोप रहे हैं और तीन सदस्यीय नियुक्ति समिति ने इसे नजरअंदाज किया है.

क्या था मामला 

चौधरी को सीवीसी के रूप में नियुक्त करने पर 22 जुलाई 2015 को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. जिसमे उनकी नियुक्ति को लेकर कई सवाल उठाये गए थे. वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा के अंडर में जब इनकम टैक्स अधिकारियों की जांच की जा रही थी तब वह सिन्हा से उनके घर पर चार बार मिले थे. रामजेठमलानी और सुब्रमण्यम स्वामी ने भी उनके अपॉइंटमेंट पर सवाल उठाया था.

 

कौन हैं केवी चौधरी 

केवी चौधरी मोदी सरकार के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं. चौधरी वह अफसर रहे हैं जिनकी अगुवाई में साल 2013 में नितिन गडकरी की फर्म पर छपेमारी की गई थी जिसके बाद गडकरी को इस्तीफ़ा तक देना पड़ा था. नरेन्द्र मोदी सरकार ने उन्हें अगस्त 2014 में CBDT के चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया. चौधरी का CBDT के चेयरमैन के रूप में कार्यकाल तीन ही महीने का था लेकिन रिटायर होने से पहले 22 नवंबर 2014 को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सहारा पर छपेमारी की.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को इस छापेमारी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, बैंक से जुड़े दस्तावेज और सहारा द्वारा कई नेताओं को चंदा देने के कागजात मिले। सूत्रों की माने तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में इन दस्तावेजों में जो डिटेल मिली उसमे कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कई ताकतवर नेताओं के नामों का जिक्र है, जिनको सहारा द्वारा चंदा दिया गया था.

8 जून 2015 को के वी चौधरी को सीवीसी का हेड बनाया गया. चौधरी ऐसे पहले सीवीसी चेयरमैन हैं जिन्हें नॉन आईएएस होते हुए भी सतर्कता आयुक्त बनाया गया. यह भी उनपर केंद्र सरकार की मेहरबानी रही कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ब्लैकमनी की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) का उन्हें अडवाइजर बनाया गया.

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First published: 2 July 2018, 12:40 IST
 
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