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स्विस बैंक के 2600 निष्क्रिय खाताधारको में से 4 हिंदुस्तानी, यहां देखें सूची

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 16 December 2015, 23:12 IST
QUICK PILL
  • 60 सालों में जिन ग्राहकों ने बैंक से संपर्क नहीं किया, ऐसे 2600 ग्राहकों की स्विस बैंक एसोसिएशन ने ऑलनाइन सूची जारी की है. इसमें चार भारतीय हैं.
  • निष्क्रिय खाताधारकों के वारिसों को अपना दावा साबित करने के लिए एक साल का वक्त दिया गया था, इसके बावजूद इन खातों की सुध लेने वाला कोई नहीं मिला.

स्विस बैंक ने बुधवार को अपने 2600 निष्क्रिय खाताधारकों की घोषणा की. ये ऐसे खाते हैं जिनको बीते 60 सालों से संचालित नहीं किया गया है. इस सूचना से जिन स्विस बैंक के ग्राहकों की मृत्यु हो चुकी है उनके रिश्तेदारों को अपने परिवार की संपत्ति पाने का एक अच्छा अवसर मिल सकेगा. पीटीआई द्वारा जारी सूचना के मुताबिक इस सूची में से कम से कम चार नाम हिंदुस्तानियों के हैं.

सूची में छह भारतीयों में चार के निवास स्थान भारत अंकित हैं, जबकि एक व्यक्ति के पेरिस (फ्रांस) में रहने की जानकारी अंकित है. छठे व्यक्ति के निवास स्थान का खुलासा नहीं किया गया है. चार में से तीन विदेशी मूल के व्यक्ति हैं. इनमें पिएरे वाचेक (बंबई अब मुंबई), बहादुर चंद्र सिंह (देहरादून), डॉ. मोहन लाल (पेरिस) तथा किशोर लाल शामिल हैं.

स्विस बैंक द्वारा जारी ऑनलाइन सूची के मुताबिक उनके खातों में करीब 299 करोड़ रुपये की संपत्ति पड़ी हुई है. इसके अलावा 80 डिपॉजिट लॉकरों में अज्ञात रकम और कीमती सामान भी पड़ा है.

निर्धारित अवधि के दौरान यदि कोई दावा नहीं करता है तो इन खातों को नष्ट कर पूरी संपत्ति सरकार को सौंप दी जाएगी

इस तरह की सूची उन खाताधारकों की बनाई जाती है जिनके खातों में कम से कम 33,500 रुपये बचे हों और जिनसे बैंक का 60 सालों से कोई संपर्क नहीं हुआ हो. खाताधारकों की ऐसी संपत्ति के वारिस को दावा साबित करने के लिए एक साल का वक्त दिया जाता है. अगर बैंक का खाताधारक से संपर्क 1955 से पहले ही खो गया था तो ऐसे ग्राहकों के वारिस को दावा साबित करने के लिए पांच साल का वक्त दिया जाता है.  

इस निर्धारित अवधि के दौरान यदि कोई दावा नहीं करता है तो इन खातों को बंद कर पूरी संपत्ति सरकार को सौंप दी जाती है. 

इस साल की शुरुआत में स्विस बैंकिंग कानूनों में हुए बदलाव के बाद निष्क्रिय खातों की सूची को ऑनलाइन करने के लिए मजबूर किया गया था. स्विस बैंकर्स एसोसिएशन (एसबीए) के चीफ एग्जीक्यूटिव क्लाउडे अलैन मार्गेलिस्च ने इस कदम की प्रशंसा करते हुए इसे बैंकों के लिए "कानूनी वैधता" प्रदान करने वाला कदम बताया.

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पूर्व में हुए घोटालों के बाद, एसबीए ने निष्क्रिय खातों के मालिकों या वारिसों की ट्रैकिंग की प्रक्रियाओं को सख्त कर दिया. 1996 के बाद से यह संभव हो गया कि लोग स्विस बैंकिंग लोकपाल का उपयोग कर अपने पुरखों की संपत्ति का पता लगा सकें. 

निष्क्रिय खाताधारक वो होते हैं जिनके खातों में कम से कम 33,500 रुपये हों और बैंक का 60 सालों से कोई संपर्क नहीं हुआ हो

एसबीए के मुताबिक, बैंकिंग लोकपाल आने के बाद 2001 और 2014 के बीच में 348.40 करोड़ रुपये और 42 सुरक्षित जमा बॉक्सों को उनके असल कानूनी मालिकों तक पहुंचाया गया.

First published: 16 December 2015, 23:12 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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