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घाटे से जूझ रही जेट एयरवेज को उबारने के लिए हिस्सेदारी खरीद सकती है टाटा

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 November 2018, 13:04 IST

टाटा संस जल्द घाटे में चाल रही एयरलाइन जेट एयरवेज में शेयर खरीद सकता है. एक खबर की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में टाटा संस के मुख्य वित्तीय अधिकारी सौरभ अग्रवाल और जेट एयरवेज का अध्यक्ष नरेश गोयल में मुलाकात कर चर्चा की है. सोमवार को लगातार तीसरे तिमाही नुकसान के बाद कर्जे में चल रही जेट एयरवेज ने कहा कि उसने लागत कम करने और राजस्व बढ़ाने के प्रयासों के तहत कम लाभदायक मार्गों पर उड़ानों में कटौती करने की योजना बनाई है. बढ़ती तेल की कीमतों, कमजोर रुपये, कम किराए और मूल्य प्रतिस्पर्धा ने तेज़ी से बढ़ रहे विमानन बाजार एयरलाइन कंपनियों के सामने चुनौती कड़ी की है.

इससे पहले मीडिया में खबर आयी थी कि कंपनी के लिए पूंजी जुटाने के संघर्ष ने संस्थापक नरेश गोयल को एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के दरवाजे पर ला खड़ा किया है. गोयल ने इस इसको लेकर रतन टाटा से भी संपर्क किया था. जेट एयरवेज में 51% की हिस्सेदारी रखने वाले गोयल के टाटा से बात करने की बात सामने आयी थी.

 

बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल नकदी संकट झेल रही अपनी विमानन कंपनी के लिए निवेशक तलाशने के क्रम में पिछले सप्ताह लंदन में टाटा समूह के वरिष्ठ प्रतिनिधियों से मिले. जबकि टाटा संस के चेरयमैन एन चंद्रशेखरन और समूह के मुख्य वित्तीय अधिकारी सौरभ अग्रवाल ने टाटा समूह की ओर से बैठक में प्रतिनिधित्व किया.

मिंट की रिपोर्ट के अनुसार इस बार गोयल ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर मुकेश अंबानी से संपर्क किया है. रिपोर्ट के अनुसार अंबानी ने अभी तक गोयल के प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया है. रिपोर्ट के अनुसार एक करीबी व्यक्ति ने कहा कि टाटा समूह जेट एयरवेज में हिस्सेदारी लेने में रूचि रख सकता है.

गुजरतालाब है कि एयरएशिया इंडिया प्राइवेट के जरिये टाटा पहले ही एयरलाइन इंडस्ट्री में मौजूद है. रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा समूह ने ईमेल और फोन कॉल के माध्यम से टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया. कहा जाता है कि जेट एयरवेज के प्रमोटर गोयल ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी से हिस्सेदारी के लिए अपनी व्यक्तिगत क्षमता में संपर्क किया था. जेट एयरवेज में अबू धाबी स्थित एतिहाद एयरवेज का 24% हिस्सा है. तेजी से बढ़ती ईंधन की कीमतों के बावजूद और अन्य खर्चों में वृद्धि के कारण घरेलू वाहकों के बीच एक दिक्कतें बढ़ी हैं.

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First published: 13 November 2018, 13:04 IST
 
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