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टैक्स हाॅलिडेः भारतीय आईटी सेक्टर से लें सबक

नीरज ठाकुर | Updated on: 9 July 2016, 7:04 IST
(आर्य शर्मा/कैच न्यूज)

विकासशील देश अपनी बढ़ती जनसंख्या के मुताबिक रोजगार सृजन की उम्मीद में उद्योगों को टैक्स ब्रेक या टैक्स से छूट देते हैं. एक बार इस क्षेत्र के आत्म निर्भर हो जाने के बाद इससे होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई आगामी सालों में की जा सकती है.

इसी आधार पर भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी क्षेत्र को बीस साल का लम्बा कर अवकाश प्रदान किया है. इसी कर अवकाश के दौरान यह आईटी कम्पनियां भारत के मध्यम वर्ग के लिए रोजगार सृजन का बड़ा केंद्र बन गई हैं, आंकड़ों में यह 25 से 33 प्रतिशत माना जा सकता है. इन कम्पनियों को आईटी पार्क बनाने के लिए सस्ती जमीन भी दी गई.

अगले पांच सालों में आईटी सेक्टर की 14 लाख जॉब्स पर खतरा

टैक्स से छूट की यह योजना 2011 में समाप्त हो चुकी है. शुक्र है कि इस कर अवकाश की बदौलत आज भारत की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 8 फीसदी का योगदान है. इस क्षेत्र में 35 लाख लोगों को सीधे रोजगार मिला है. हालांकि तस्वीर तेजी से बदल रही है. आगामी वर्षों में इस क्षेत्र का योगदान जीडीपी में और बढ़ सकता है लेकिन इसमें रोजगार की संख्या में कमी आ सकती है.

रोजगार की कमी

एक अमेरिकी फर्म एचएफएस रिसर्च के अनुसार आधुनिक मशीनीकरण के दौर में 6.4 लाख अर्ध कुशल रोजगार में कमी हो सकती है या यूं कहें कि अगले पांच वर्षों में भारत के आईटी और बीपीओ सेक्टर में हर पांच में से एक नौकरी जा सकती है.

ज्यादा लाभ कमाने के उद्देश्य से इस माॅडल के तहत अब लोगों की संख्या कम की जाने लगी है. फिलहाल ऐसे दावे किये जा रहे हैं कि केवल निचले स्तर की नौकरियों को खतरा है जबकि प्रोद्यौगिकी के क्षेत्र में यह तय नहीं है कि कब एक उच्च स्तर की नौकरी निम्न स्तर की बन जाए.

भारतीय स्थिति

भारतीय कामगारों के आंकड़ों में भविष्य में भरी गिरावट होने की संभावना है. वर्तमान में भारत में कामकाजी जनसंख्या का आंकड़ा लगभग 50 करोड़ है. अगले दो दशकों के लिए भारत में प्रति वर्ष एक करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करने होंगे. अगर ऐसा नहीं होता है तो बेरोजगार युवाओं की संख्या बढ़ जाएगी और सामाजिक विषमता बढ़ेगी.

क्या कोई समाधान है?

कंपनियों को तकनीक का इस्तेमाल करने से रोकना तो संभव नहीं है. परन्तु सरकारों के लिए यह काफी हद तक संभव है कि सरकार कठोर श्रम वाले क्षेत्रों के लिए कर लाभ का इस्तेमाल करे. उदाहरण के लिए मौजूदा सरकार विद्युत उत्पादन क्षेत्र के लिए दस साल के लिए टैक्ट छूट पर विचार कर रही है.

सरकार के शीर्ष थिंक टैंक नीति आयोग ने यह प्रस्ताव पेश किया है. इसका तर्क है कि कर अवकाश से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को फायदा होगा, जो भारत में रोजगार सृजन के लिए एक अरब डाॅलर से अधिक निवेश करती हैं. परन्तु विद्युत निर्माण क्षेत्र भी अब मशीनीकरण की ओर बढ़ रहा है.

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दुनिया की नामी मोबाइल फोन निर्माता कम्पनी फाॅक्सकाॅन इसका जीता जागता उदाहरण है. कम्पनी ने इस वर्ष मई माह में करीब 60,000 लोगों को हटा दिया है. यहां कर्मचारियों का स्थान रोबोट्स ने ले लिया है. 

भारत सरकार भी इसी तर्ज पर फाॅक्सकाॅन और बहुत सी अन्य कंपनियों के लिए यही कार्य माॅडल अपनाने को प्रोत्साहन दे रही है. इसलिए किसी भी सेक्टर में टैक्स छूट लागू करने से पहले एक सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि क्या इस क्षेत्र की कम्पनियां राजस्व की भरपाई के लिए पर्याप्त रोजगार सृजन कर पाएंगी.

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बिजनेस टुडे में प्रकाशित एक लेख में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर जयंती घोष ने लिखा है, ‘भारत दुनिया में सबसे कम टैक्स-जीडीपी अनुपात वाला देश है. यह 185 से भी कम है, जो कि ब्रिक्स देशों से भी कम है. 34 प्रतिशत के साथ ब्राजील पहले स्थान पर है. दक्षिण अफ्रीका 27 प्रतिशत के साथ दूसरे और चीन और रूस क्रमश: 22 और 19.5 प्रतिशत के साथ अगले पायदानों पर हैं.'

घोष ने आगे लिखा है कि वर्ष 2013-14 में जहां कारपोरेट लाभ पर टैक्स 33.2 प्रतिशत था, 90 फीसदी कारपोरेट द्वारा मात्र 23.2 प्रतिशत औसत प्रभावी टैक्स का भुगतान किया गया. साफ तौर पर यह व्यक्तिगत और कारपोरेट स्तर पर दिए गए बहुत सारे टैक्स अवकाशों का नतीजा है. यह पैसा भारत की जनता के कल्याण के काम आ सकता था.

आईटी सेक्टर से लें सबक

किसी भी सेक्टर को उछाल देने के लिए टैक्स छूट देना पूरी तरह से खराब आइडिया नहीं है. परन्तु पूरे बीस साल तक किसी क्षेत्र को लाभ कमाने की छूट देना वाकई खतरनाक है.

दूसरे क्षेत्रों की कीमत पर भारत सरकार बीस साल तक आईटी क्षेत्र को बढ़ावा देती रही और नतीजा यह निकला कि यह क्षेत्र अब जल्द ही रोबोट्स की भर्ती करेगा जिससे बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां चली जाएंगी. यह गलती दोहराई नहीं जानी चाहिए.

First published: 9 July 2016, 7:04 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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