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चुनावी फंडिंग पर खुलासा- TCS ने इलेक्टोरल ट्रस्ट को दिए 220 करोड़

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 April 2019, 12:04 IST

टीसीएस ने कहा कि उसने मार्च में समाप्त चौथी तिमाही में एक चुनावी ट्रस्ट को 220 करोड़ रुपये (31.2 मिलियन डॉलर) दिए, जो उसके लाभ और हानि खाते में अन्य खर्चों के तहत था. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार टीसीएस का यह यह डोनेशन अभी तक की गई उसकी चुनावी फंडिंग में सबसे ज्यादा है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह डोनेशन किन राजनैतिक दलों को दिया गया.

टीसीएस सहित टाटा समूह की कंपनियों ने पहले भी चुनावी ट्रस्टों को पैसा दिया है. टीसीएस ने पहले प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट को पैसा दिया था, जिसे 2013 में टाटा ट्रस्ट्स द्वारा स्थापित किया गया था. ट्रस्ट ने 1 अप्रैल 2013 से 31 मार्च 2016 के बीच कई राजनीतिक दलों को वित्त पोषित किया. इस दौरान कंपनी ने कांग्रेस और बीजू जनता दल के बाद जनता दल को सबसे ज्यादा चनदा दिया, जो 1.5 करोड़ रुपये था. भारत में कई चुनावी ट्रस्ट हैं, जो कॉर्पोरेट्स और राजनीतिक दलों के बीच मध्यस्थ हैं.

 

इनमें से सबसे बड़ा प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट है, जहां सबसे बड़ा योगदान भारती ग्रुप और डीएलएफ का है. 2017-18 में प्रूडेंट ने 169 करोड़ में से 144 करोड़ भाजपा को दे दिया. भारत के चुनाव आयोग के साथ टाटा की प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट द्वारा दायर नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इसने वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान किसी भी राजनीतिक दल में कोई योगदान नहीं दिया और इसका डेफिसिट 54,844 रुपये है.

शुक्रवार को पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों को बॉन्ड के बारे में जानकारी देनी होगी. सभी राजनीतिक दलों को 15 मई तक मिले इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी सीलबंद लिफाफे में 30 मई तक चुनाव आयोग को सौंपनी होगी. दलों द्वारा दी गई इस जानकारी में चंदा देने वालों का ब्यौरा भी शामिल होगा.

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First published: 13 April 2019, 12:04 IST
 
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