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'टेलिकॉम कंपनियों के हाथ बांध दिए गए हैं, अदालत जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं'

सुनील रावत | Updated on: 1 March 2018, 14:39 IST

भारत की शीर्ष दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल का कहना है कि लागत से कम कीमत पर सेवाएं देने के मामले में TRAI के नियमों के खिलाफ अदालत जाने के अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है. स्पेन के बार्सिलोना में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस के मौके पर मित्तल ने कहा कि अब टेलीकॉम कंपनियों का काम करना दुश्वार होता जा रहा है.

मित्तल ने कहा कि TRAI के फैसले से टेलीकॉम कंपनियां नाराज हैं और ट्राई के फैसले से जियो को लाभ हो रहा है. मित्तल ने एयरसेल के अधिग्रहण से इंकार किया. गौरतलब है कि जियो ने खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन किया है. उसका कहना है कि जियो के बाद उनका काम करना बेहद मुश्किल हो गया है.

सुनील भारती मित्तल का कहना है कि अगर हाथ बांध दिए जायें तो टेलीकॉम कंपनियां काम नहीं कर सकती हैं. इससे पहले इसी तरह की बात वोडाफोन की तरफ से भी कही जा चुकी है.

अब क्यों हुआ विवाद 

अब नया विवाद  TRAI के प्रिडेटरी प्राइसिंग पर बनाये नियमों को लेकर है. प्रिडेटरी प्राइसिंग का मतलब है अन्य कंपनियों से आगे निकलने के लिए बेहद कम प्राइस पर सर्विस देना. टेलीकॉम कंपनियों ने आरोप लगाया था कि प्रिडेटरी प्राइसिंग पर टेलीकॉम रेगुलेटर का नया ऑर्डर रिलायंस जियो इंफोकॉम के पक्ष में है. कोलाहो ने कहा है कि इस ऑर्डर को कानूनी चुनौती दी जानी चाहिए.

इसके जवाब में ट्राई का कहना था कि टेलीकॉम कंपनियों की संस्था COAI इससे पहले भी उस समय अदालत गई थी जब उसने एक ऑपरेटर के टैरिफ प्लान को लेकर TRAI पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था और उस मामले में COAI की हार हुई थी. यह टैरिफ प्लान रिलायंस जियो इंफोकॉम का था.

इससे पहले जियो COAI और उसके डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करवाने की चेतावनी दे चुका है. जियो का कहना है कि COAI को उससे सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए.

TRAI के हाल के ऑर्डर में कहा गया था कि भविष्य में प्रिडेटरी प्राइसिंग को एवरेज वेरिएबल कॉस्ट और इस आधार पर तय किया जाएगा कि क्या कोई टेलीकॉम कंपनी अपने कॉम्पिटिशन को कम करने या समाप्त करने के इरादे से तो कम प्राइस नहीं पेश कर रही है.

First published: 1 March 2018, 14:32 IST
 
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