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ऑटो के बाद कपड़ा इंडस्ट्री संकट में, अख़बार में छपवाया नौकरियां जाने का विज्ञापन

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 August 2019, 16:03 IST

ऑटो सेक्टर में चल रहे संकट के बाद अब उत्तर भारत स्थित कई कपास कताई मिलों को मांग की कमी के कारण अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है. निर्माताओं को कमजोर निर्यात कि मांग और कीमतों के कारण दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. यहां तक कि कई मिलों ने उत्पादन बंद कर दिया है.

नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन आज के कई बड़े अख़बारों में आधे पन्ने का विज्ञापन दिया है.इसमें कहा गया है है कि कताई उद्योग बड़े संकट से गुजर रहा है. इसमें कहा गया है कि भारतीय स्पीनिंग उद्योग में मंदी के कारण नौकरियां जा रही हैं.

 

निर्माताओं का औसतन, उत्पादन 25-30% कम है. 750 लाख स्पिंडल की स्थापित क्षमता के साथ उत्तरी क्षेत्र देश की कुल क्षमता में 15% का योगदान देता है. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में लगभग 200 कताई इकाइयाँ हैं. टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (NITMA)का कहना है कि “घटती मांग को देखते हुए मिलों ने पिछले 2-3 हफ्तों से उत्पादन बंद कर दिया है.

कई कताई मिलों ने सप्ताह में कम के दिन सात से घटाकर पांच कर दिए हैं. उद्योग के अनुसार भारतीय कपास अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में घरेलू बाजार में लगभग 25% महंगा है. इसने भारतीय यार्न निर्माताओं को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अप्रतिस्पर्धी बना दिया है.

अनुसंधान एजेंसी ICRA के अनुसार, भारत के सूती धागे के निर्यात में Q1 FY2020 में 33% Y-o-Y की गिरावट आई (मई और जून 2019 में 41%) और जून 2019 में सात साल के निचले स्तर 59 मिलियन किलोग्राम था.

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First published: 20 August 2019, 15:59 IST
 
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