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टैक्स चोरी का गढ़ ये छोटा देश कर रहा है भारत में सबसे ज्यादा निवेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 January 2018, 12:12 IST

विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए भारत लगातार एफडीआई को बढ़ावा रहा है. इसी कड़ी में भारत ने हाल ही में रिटेल एफडीआई को सौ फीसदी कर दिया. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किये गए एक आंकड़े में बताया गया है कि भारत में आज भी सबसे ज्यादा विदेशी निवेश मॉरीशस से आ रहा है.

जबकि अमेरिका और ब्रिटेन का नाम इस छोटे से देश के बाद आता है. बता दें कि मॉरीशस टैक्स हेवन देश के रूप में विख्यात है. कहा जाता है कि हवाला कारोबारी इसी देश के जरिये अपने कालेधन को देश में वापस ले आते हैं. आरबीआई के आंकड़े कहते हैं कि भारत में हुए कुल विदेशी निवेश का 21.8 प्रतिशत हिस्सा मॉरीशस का है.

आरबीआई की गणना में शामिल 18,667 कंपनियों में से 17,020 कंपनियों के मार्च 2017 में समाप्त वित्त वर्ष के खाते में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश या फिर विदेशों में उनके प्रत्यक्ष निवेश की स्थित को शामिल किया गया है. इसमें कहा गया है. मार्च 2017 की स्थिति के अनुसार निवेश करने वाली 96 प्रतिशत कंपनियां गैर-सूचीबद्ध कंपनियां हैं.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जिन 15,169 कंपनियों ने एफडीआई होने की जानकारी दी है उनमें से 80 प्रतिशत से अधिक कंपनियां अपनी विदेशी कंपनियों की अनुषंगी हैं. यानी उनके किसी एक विदेशी निवेशक के पास 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है.

मई 2016  में भारत और सिंगापुर ने एक टैक्स संधि की थी. इस संधि का मकसद टैक्स चोरी को रोकना था. मॉरीशस भारत एफडीआई का बड़ा सोर्स है. इंडिया में एफडीआई का 34 पर्सेंट से ज्यादा हिस्सा मॉरीशस से आता है, वहीं सिंगापुर की हिस्सेदारी 16 पर्सेंट की है.

सिंगापुर के रास्ते टैक्स चोरी करने वाले अपने कालेधन को देश में वापस लाते रहे हैं. इसीलिए भारत ने 2017 में जनरल एंटी-अवायडेंस रूल्स को लागू करने की योजना बनाई थी. 

First published: 21 January 2018, 12:12 IST
 
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