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इस वित्त वर्ष में लागू नहीं हो पायेगी 'मोदी केयर' स्कीम', खर्च पर भी हैं ये सवाल

सुनील रावत | Updated on: 3 February 2018, 17:19 IST

वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा शनिवार को बजट में घोषित की गयी चिकित्सा बीमा योजना 'मोदी केयर' के खर्च को लेकर विपक्ष एक तरफ सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि इसे अगले वित्त वर्ष से लागू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर धन का आवंटन बढ़ाया जाएगा. 

हालांकि बजट 2018 में घोषित की गयी ज्यादातर योजनाओं की समय सीमा 2022 तक रखी गयी है. एक टीवी कार्यक्रम कोंग्रस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार इस स्कीम के लिए इतना पैसा कहां से लाएगी यह सोचने वाली बात है. 

 

जेटली ने यहां कहा, ‘‘इसके तहत माध्यमिक और उच्चस्तरीय अस्पतालों में भर्ती के खर्च का बीमा होगा. निश्चित तौर पर इसमें तमाम सरकारी अस्पताल और कुछ चुनिंदा निजी अस्पताल शामिल होंगे. यह योजना विश्वास और बीमा के मॉडल पर आधारित हो सकती है.’ उन्होंने कहा कि इसके तरीके पर नीति आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच चर्चा चल रही है. उन्होंने कहा कि इसे अगले वित्त वर्ष में क्रियान्वयित किया जाएगा.

ओपन मैगजीन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कहा कि बीमा मॉडल होने से जैसे जैसे बीमाधारकों की संख्या बढ़ेगी, प्रीमियम कम होगा. जेटली ने योजना के पूरी तरह सरकारी वित्तपोषित होने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि दो हजार करोड़ रुपये की शुरुआती राशि का आवंटन कर दिया गया है. योजना के लागू होने के बाद जितनी भी राशि की आवश्यकता होगी, वह दी जाएगी.

उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले साल में मैं और सहज स्थिति देख पा रहा हूं. जहां तक प्रत्यक्ष कर में ग्राफ का संबंध है तो यह तेजी से चढ़ेगा.’’ जेटली ने कहा कि नोटबंदी तथा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के बाद प्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या बढ़ी है. कर-चोरी रोकने के उपाय होते ही मुझे जीएसटी संग्रह में भी बढ़ोत्तरी की उम्मीद है. मुझे नहीं लगता कि राजस्व कोई बड़ी चुनौती होने वाला है.

मोदी केयर के लिए पैसा कहा से आएगा   

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट की माने तो यूपीए सरकार के वक्त 30 हज़ार रुपये सालाना के हेल्थ कवरेज का ऐलान हुआ जिसके लिए सालाना कुल 1100 करोड़ प्रीमियम खर्च करना पड़ता है. एनडीए सरकार ने दो साल पहले एक लाख रुपये के कवरेज का वादा किया जिसका फायदा अब तक किसी को नहीं मिल पाया है.

'मोदीकेयर' के तहत सरकार ने 50 करोड़ लोगों को पांच साल सालाना हेल्थ बीमा देने का ऐलान किया है. 30 हज़ार रुपये की बीमा योजना के लिए सरकार को 750 रुपये प्रीमियम देना होता है और इस हिसाब से पांच लाख रुपये बीमा कवरेज के लिए 12000 रुपये की किस्त जमा करनी होगी. इतना बीमा देने के लिए सरकार को हर साल कुल सवा लाख करोड़ रुपये का प्रीमियम देना होगा जो केंद्र और राज्य सरकारों के सम्मिलित हेल्थ बजट से ज्यादा है.

‘मोदीकेयर’ के रूप में चर्चित राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के तहत कुल आबादी के 40 प्रतिशत यानी 10 करोड़ परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आने पर पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा बीमा सुरक्षा दी जाएगी.

First published: 3 February 2018, 17:18 IST
 
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