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देश के इन राज्यों में महिलाओं के नाम है सबसे ज्यादा जमीन

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 February 2018, 15:15 IST

एक रिपोर्ट की माने तो 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, जमीन के अधिकार महिलाओं के पास लक्षद्वीप और मेघालय में सबसे ज्यादा हैं. जबकि पंजाब और पश्चिम बंगाल की स्थिति बद्तर है. यह जानकारी भुवनेश्वर-स्थित परामर्श फर्म ‘एनआर प्रबंधन कंसल्टेंट्स’ (एनआरएमसी) की एक शाखा, ‘सेंटर फॉर लैंड गवर्नेंस’ द्वारा बनाए गए एक सूचकांक में सामने आई है.

इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के अनुसार यह सूचकांक वर्ष 2011 की कृषि जनगणना से महिलाओं की परिचालित होल्डिंग्स पर आंकड़े, 2011-12 के भारतीय मानव विकास सर्वेक्षण से कृषि भूमि वाले वयस्क महिलाओं की हिस्सेदारी, 2011 की सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना से भूमि के मालिक महिलाओं के नेतृत्व वाले घरों की हिस्सेदारी, और 2015-16 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण से घर और / या जमीन की महिला मालिकों (अकेले या संयुक्त रूप से) की हिस्सेदारी के आंकड़ों का उपयोग कर बनाया गया है.

यह सूचकांक, राज्यों को प्रतिशत अंकों में भूमि अधिकार रखने वाली महिलाओं के आधार पर स्थान देता है. औसतन, 12.9 फीसदी भारतीय महिलाएं भूमि धारक हैं.

महिला भूमि अधिकार सूचकांक पर ऊपर के 10 राज्य

दक्षिणी राज्यों में, औसतन 15.4 फीसदी महिलाएं भूमि धारक हैं, और पूर्वोत्तर राज्यों में, 14.1 फीसदी महिलाएं भूमि की मालिक हैं. इन कम आंकड़ों के साथ, इन राज्यों ने उत्तरी राज्यों को मात दे दिया, जहां 9.8 फीसदी महिलाएं जमीन की मालिक हैं और पूर्वी राज्य जहां 9.2 फीसदी महिलाएं भूमि धारक हैं.

एक देश के लिए स्थायी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने, जैसे गरीबी समाप्त करने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, लिंग समानता को प्राप्त करने, और शहरों और मानव बस्तियां समावेशी बनाने के लिए महिलाओं के लिए सुरक्षित और निष्पक्ष भूमि अधिकार महत्वपूर्ण हैं, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित स्थाई विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में बताया गया है.

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छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85) के बाद से भूमि और घरों की जगहों को बांटने के दौरान सरकार ने पुरुषों और महिलाओं को संयुक्त नाम देने का इरादा पेश किया है. हालांकि, डेटा एक खराब रिकॉर्ड दिखाते हैं.

12.8 फीसदी संचालन भूमि की मालिक हैं महिलाएं

संयुक्त राष्ट्र (एफएओ) के खाद्य और कृषि संगठन के लिंग और भूमि अधिकार डेटाबेस के अनुसार भारत के कृषि श्रमिक बल का एक तिहाई (32 फीसदी) महिलाएं गठन करती हैं और कृषि उत्पादन के लिए 55-66 फीसदी योगदान करती हैं.

‘सेंटर फॉर लैंड गवर्नेंस इंडेक्स ’ के अनुसार फिर भी, भारत के परिचालन होल्डिंग्स के कुल क्षेत्रफल के 10 वीं (10.3 फीसदी) का गठन करने वाले क्षेत्र की तुलना में केवल 12.8 फीसदी ( चीन में 17 फीसदी से कम ) परिचालन होल्डिंग्स की मालिक महिलाएं हैं.

पुरुषों की गैर कृषि गतिविधियों में बदलने की प्रवृति से आगे कृषि में महिलाओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, जैसा कि संस्था ऑक्सफाम-इंडिया द्वारा वर्ष 2013 के संक्षिप्त रिपोर्ट में कहा गया है. रिपोर्ट में कहा गया कि, ” नाम से भूमि न होने की स्थिति में महिलाओं को किसानों के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है, और इस तरह क्रेडिट और सरकारी लाभों तक पहुंच नहीं पा रही हैं “.

कृषि जनगणना 2011 में दर्ज आंकड़ों के आधार पर महिलाओं के साथ भूमि होल्डिंग के प्रतिशत में टॉप तीन राज्य लक्षद्वीप (41.0 फीसदी), मेघालय (34.4 फीसदी) और अंडमान निकोबार (29.7 फीसदी) हैं.

First published: 27 February 2018, 15:15 IST
 
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