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गर्मियों में बहुत शोर करता था कूलर, अहमदाबाद के इस घर से शुरू हुई Symphony कूलर की कहानी

सुनील रावत | Updated on: 30 April 2019, 17:38 IST

आग उगलते सूरज ने पारा 40 के पार पहुंचा दिया है. दिल्ली एनसीआर में तो बिना एसी और कूलर के रहना संभव नहीं है. ऐसे में सिंफनी के कूलर बाजार में खूब देखे जा रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिंफनी की शरुआत अहमदाबाद के एक घर से हुई थी. अहमदाबाद की इस कंपनी ने फिस्कल -ईयर 2017-18 में 854 करोड़ का टर्नओवर हासिल किया. सिंफनी का बाजार पूंजीकरण 8,900 करोड़ के करीब है, इसकी शेयर की कीमत पिछले पांच वर्षों में तीन गुना हो गई है. अपने राजस्व के आधार पर सिंफनी 2019 की फॉर्च्यून इंडिया की सूची 500 में 369 से 325 वें स्थान पर पहुंच गया.

कैसे बना सिम्फनी का कूलर

एकमात्र उत्पाद बनाने वाली कंपनी के लिए यह बड़ी सफलता है. 59 वर्षीय अचल बकेरी ने 1988 में अहमदाबाद में अपने परिवार द्वारा विकसित की जा रही एक निर्माणाधीन रियल एस्टेट परियोजना के बेसमेंट में इस कंपनी की शुरुआत की थी. 2002 में कई लोगों को लगता था कि सिंफनी बंद होने के करीब है. आर्किटेक्ट बकेरी ने अपना एमबीए रियल एस्टेट फाइनांस में यूएस से पूरा किया था. बकेरी 1986 में भारत आ गए और अपने परिवार के रियल एस्टेट व्यवसाय में शामिल हो गए.

 

बकेरी का कहना है कि वह कुछ और करना चाहते थे. 1987 की गर्मियों में उनका परिवार नए घर में चला गया. उस वक़्त कूलर बेहद आवाज करते थे. फार्च्यून इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बकेरी का कहना है ''एक दिन मेरे पिता ने कूलर की आवाज सुनकर मुझसे कहा 'आप एक बेहतर एयर कूलर क्यों नहीं बनाते, और वह मेरे दिमाग में क्लिक कर गया, फिर मैंने इस पर काम करना शुरू कर दिया''.

हालांकि उन्हें इस बात का अनुभव नहीं था कि एक एयर कूलर कैसे बनाया जाता है. बकेरी कहते हैं उन्होंने बाजार से कुछ कूलर खरीदे और उन्हें खोलना शरू कर दिया. इन कूलर की इंजीनियरिंग को समझना शुरू कर दिया. कुछ तकनीशियनों और इंजीनियरिंग प्रोफेसरों की मदद से बेकेरी ने एक एयर कूलर विकसित किया, जो दिखने में एक एसी जैसा था. आकार में कॉम्पैक्ट था, प्लास्टिक से बना था और हल्का और पोर्टेबल था.

सिंफनी का यह उत्पाद 1988 में अहमदाबाद में लॉन्च किया गया. अहमदाबाद अपनी शुष्क और चिलचिलाती गर्मी के लिए जाना जाता था इसलिए इसे तुरंत सफलता का हाथ लगी. बकेरी कहते हैं, '' इसे इतनी सफलता मिली कि हम लोगों की डिमांड ही पूरी नहीं कर पाए. 4,300 की कीमत पर सिंफनी के पहले कूलर की कीमत उन दिनों में 1.5 टन के एसी लागत के 10% से कुछ अधिक थी.

अगले कुछ वर्षों में सिम्फनी ने तेजी से पूरे भारत में बिक्री और वितरण बढ़ाया. कंपनी बेसमेंट से बाहर निकल गई और एयर कूलर के निर्माण के लिए एक कारखाना स्थापित किया. 1994 में सिम्फनी बड़ा उत्पाद बन चुका था.

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First published: 30 April 2019, 13:12 IST
 
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