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चीन इस तकनीक के लिए निर्भर है पूरी तरह अमेरिका पर, ट्रेड वॉर के बाद बढ़ी मुश्किल

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 July 2018, 15:57 IST

अमेरिका और चीन के ट्रेड वार में पूरी दुनिया को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है. चीन दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बन रहा है और वह अमेरिकी प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में सबसे अग्रणीय रहा है. इस ट्रेड वॉर में चीन के लिए दुखी करने वाली बात यह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल वाली वाली उसकी ज्यादातर तकनीक पश्चिम पर ही निर्भर है. जानकारों का कहना है कि चीन का उद्योग अमेरिकी प्रौद्योगिकी के बिना काम नहीं कर सकता हैं.

उद्योग विश्लेषकों के मुताबिक चीन की एक बड़ी कमजोरी सेमीकंडक्टर्स है. यह तकनीक स्मार्टफोन से लेकर कारों तक में उपयोग की जाती है. दशकों के सरकारी प्रयासों के बाद भी चीन इस तकनीक को बनाने में वह कामियाब नहीं हो पाया है. जानकार मानते हैं कि इसे बनाने के लिए चीन को अभी वर्षों की जरूरत है. बीएमआई रिसर्च के केनी लियू के अनुसार व्यापार आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल चीन ने इसके लगभग 26 अरब डॉलर के एकीकृत सर्किट आयात किए थे.

हालांकि चीन ने सफलता की कई कहानियां लिखी है, जिनमे हूवेई टेक्नोलॉजीज ने फोन कंपनियों के लिए स्विचिंग गियर का सबसे बड़ा वैश्विक विक्रेता और नंबर 3 स्मार्टफोन ब्रांड शामिल है. इसने अपने कुछ फोनों को सशक्त बनाने के लिए चिप सेट की अपनी किरिन लाइन विकसित की है, जो यूएस-आधारित क्वालकॉम के स्नैपड्रैगन पर निर्भरता को कम करता है.

चीन नहीं चाहता है कि वह किसी भी तरह विदशी तकनीक के आसरे रहे. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मार्च में कहा था, "स्वतंत्र इनोवेशन हमारे लिए दुनिया के तकनीकी शिखर पर चढ़ने का एकमात्र तरीका है." बीजिंग ने "मेड इन चाइना 2025" सहित कई कार्यक्रमों की घोषणा की है, जिनमे रोबोटिक्स, एआई, जैव प्रौद्योगिकी शामिल है.

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First published: 6 July 2018, 15:54 IST
 
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