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ट्रंप ने चली नई चाल, मुश्किल में पड़ सकते हैं अमेरिका में काम कर रहे इंडियन

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2019, 10:26 IST

संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को बताया कि यह उन देशों के लिए H-1B कार्य वीजा पर विचार कर रहा है जो विदेशी कंपनियों को स्थानीय स्तर पर डेटा स्टोर करने के लिए मजबूर करते हैं. भारत और अमेरिका के ट्रेड वॉर के बीच अमेरिका का यह बयान आया है. H-1B वीजा कार्यक्रम को प्रतिबंधित करने की अमेरिका की इस योजना का प्रभाव कई विदेशी श्रमिकों पर पड़ता है. इस योजना के तहत कुशल विदेशी श्रमिकों को हर साल संयुक्त राज्य अमेरिका में लाया जाता है.

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ की नई दिल्ली की यात्रा से कुछ दिन पहले यह बयाना अमेरका की ओर से आया है. गौरतलब है कि भारत ने मास्टरकार्ड जैसी अमेरिकी कंपनियों को डेटा स्टोर करने पर कड़े नए नियम लाने के लिए कहा था. दूसरी ओर H-1B पर बड़ी संख्या में अधिकांश बड़ी भारतीय प्रौद्योगिकी फर्मों के वर्कर अमेरिका में नौकरी करते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार भारत के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि उन्हें पिछले हफ्ते H-1B वीजा देने की अमेरिकी सरकार की योजना के बारे में बताया गया था, हर साल भारतीयों को वार्षिक कोटा के 10% से 15% के बीच जारी किया गया है. प्रत्येक वर्ष दी जाने वाली 85,000 एच -1 बी कार्य वीजा पर कोई वर्तमान देश-विशिष्ट सीमा नहीं है, और अनुमानित 70% भारतीय जाते हैं.

 

भारत-अमेरिका वार्ता से अवगत वाशिंगटन स्थित एक उद्योग स्रोत ने भी कहा कि अमेरिका वैश्विक डेटा भंडारण नियमों के जवाब में एच -1 बी वीजा की संख्या को कम करने के लिए विचार-विमर्श कर रहा था. हालांकि इस कदम से सिर्फ भारत को टारगेट नहीं किया गया है. अमेरिकी प्रस्ताव यह है कि जो भी देश डेटा स्थानीयकरण करेगा उसका (H-1B वीजा) कोटा के लगभग 15% तक सीमित किया जायेगा.

इस तरह के किसी भी कदम से सबसे ज्यादा प्रभावित भारत में 150 बिलियन डॉलर से अधिक का आईटी सेक्टर होगा, जिसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और इंफोसिस लिमिटेड शामिल हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में अपने सबसे बड़े बाजार में इंजीनियरों और डेवलपर्स के लिए उड़ान भरने के लिए एच -1 बी वीजा का उपयोग करता है.

सिलिकॉन वैली स्थिति तकनीकी कंपनियां भी इस वीजा का उपयोग करके श्रमिकों को काम पर रखती हैं. पिछले साल से, ट्रम्प प्रशासन परेशान है कि मास्टरकार्ड और वीजा जैसी अमेरिकी कंपनियां कई देशों में नियमों के कारण पीड़ित हैं, जो कहते हैं कि यह संरक्षणवादी हैं और तेजी से स्थानीय स्तर पर अधिक डेटा संग्रहीत करने के लिए कंपनियों की आवश्यकता होती है.

भारत ने पिछले साल विदेशी फर्मों को पर्यवेक्षण के लिए केवल भारत में अपने भुगतान डेटा को संग्रहीत करने के लिए बाध्य किया था और सरकार एक व्यापक डेटा संरक्षण कानून पर काम कर रही है जो डेटा के स्थानीय प्रसंस्करण के लिए सख्त नियम लागू करेगा जो इसे संवेदनशील मानता है.दुनिया भर की सरकारें अपने अधिकार क्षेत्र में डेटा तक बेहतर पहुंच के लिए सख्त डेटा भंडारण नियमों की घोषणा कर रही हैं.

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First published: 20 June 2019, 10:10 IST
 
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