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ट्रंप की नीतियां कैसे भारतीय अर्थव्यवस्था को करना चाहती है ख़त्म ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 June 2018, 12:14 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों का दावा है कि अमेरिका ने 2014 में सत्ता में आने के बाद से अमेरिका ने भारत को और गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है. प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका पर विशेष ध्यान दिया है और उन्होंने पिछले चार साल में अमेरिका का पांच बार दौरा भी किया है. पीएम मोदी जब भी अमेरिका के दौरे पर गए हैं उनकी पीआर मशीनरी ने अमेरिकी एनआरआई के बीच अपनी लोकप्रियता पर ध्यान केंद्रित करने के लिए काम किया है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका ने कभी भारत को गंभीरता से लिया है? यह सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि अमेरिका ने भारत से 4 नवंबर तक ईरान से तेल आयात रोकने के लिए कहा है. जबकि बढ़ती मांग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि हुई है. एक सच यह भी है कि भारत अन्य देशों से अपना 80% तेल आयात करता है. यही कारण है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा रहा है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 69 रुपये की गिरावट आई है.

 

भारत की इस परेशानी को देखते हुए भी ट्रम्प प्रशासन ने भारत के लिए किसी भी छूट पर विचार करने से इंकार कर दिया है. उनके लिए या तो भारत उनके साथ है या उनके खिलाफ है. भारत ईरान से लगभग 18 एमटी हल्के कच्चे तेल का आयात करता है और अगर भारत ईरान से कच्चे आयात करना बंद कर देता है तो कई भारतीय रिफाइनरियों को बंद करना होगा. इसके अलावा ईरान भारतीय रुपये में 45% भुगतान लेता है, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा पर दबाव कम करता है.

जानकारों का मानना है कि ईरान से तेल आयात रोकने से भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा. ओएनजीसी के पूर्व अध्यक्ष आरएस शर्मा का कहना है कि "भारत के पास कोई विकल्प नहीं है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार हैं. दो दिन पहले अमेरिका ने वाशिंगटन में अगले सप्ताह के लिए निर्धारित भारत के साथ उच्च स्तरीय '2 + 2' वार्ता स्थगित कर दी.

भारत को लेकर ट्रम्प की इसी तरह की नीति एच 1-बी वीजा को लेकर भी रही. हालही में अमेरिका ने कई भारतीय वस्तुओं पार आयात शुल्क भी बढ़ा दिया. इससे पहले ट्रम्प भारत को लेकर कह चुके हैं कि भारत हमकर सौ फीसदी से ज्यादा टैक्स लगा रहा है.

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First published: 30 June 2018, 12:06 IST
 
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