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तूतीकोरिन के स्टरलाइट कॉपर प्लांट के बंद होने से जा सकती हैं 50,000 नौकरियां

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 May 2018, 10:34 IST

तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को तूतीकोरिन में वेदांता लिमिटेड के कॉपर प्लांट को बंद करने के आदेश दिए हैं. इस प्लांट के बंद होने के बाद माना जा रहा है कि इससे भारत के सालाना कॉपर प्रोडक्शन 10 लाख टन में 40 प्रतिशत की कमी आ सकती है. यही नहीं इसके बंद होने से बिजली क्षेत्र में लगभग 800 छोटी और मध्यम इकाइयों पर असर पड़ सकता है. इनमें केबल निर्माता, वाइंडिंग तार इकाइयों और ट्रांसफॉर्मर निर्माता शामिल हैं जिनका निर्माण तूतीकोरिन के इस स्टरलाइट कॉपर प्लांट से होता था.

इस कॉपर प्लांट के बंद होने का असर भारत के कॉपर एक्सपोर्ट पर भी होगा क्योंकि तूतीकोरिन का यह प्लांट लगभग 1.6 लाख टन का एक्सपोर्ट करता है. रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने अप्रैल की एक रिपोर्ट में कहा है कि देश में कॉपर की खपत पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ रही है और मौजूदा स्थानीय मांग में प्रति वर्ष 7-8 फीसदी की वृद्धि हुई है.

भारत की कॉपर इंडस्ट्री प्रति वर्ष लगभग 10 लाख टन रिफाइंड तांबे का उत्पादन करता है. इस उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत मुख्य रूप से चीन निर्यात किया जाता है. 2016-17 में कॉपर की कुल बिक्री का 41 प्रतिशत योगदान स्टरलाइट कॉपर का रहा.

सूत्रों की मानें तो तूतीकोरिन प्लांट के बंद होने से 50,000 से ज्यादा नौकरियां जा सकती हैं. इस प्लांट को चलाने वाली कंपनी वेदांता का कहना है कि ''स्टरलाइट कॉपर प्लांट का बंद होना एक दुर्भाग्यपूर्ण है, हमने 22 वर्षों से अधिक पारदर्शी और टिकाऊ तरीके से संयंत्र का संचालन किया जो तूतीकोरिन और राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देता है.''

वेदांता लिमिटेड ने सोमवार को एक बयान में कहा कि हम इस आदेश का अध्ययन करेंगे और भविष्य के कार्यवाही के बारे में फैसला करेंगे. इस साल 3 मई को, वेदांत रिसोर्सेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कुलदीप कौर ने एक सम्मेलन के दौरान कहा "कॉपर इंडिया बिजनेस ने इस साल 4,03,000 टन उत्पादन (2017-18) दर्ज किया है.

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First published: 29 May 2018, 10:30 IST
 
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