Home » बिज़नेस » Unemployment rate at four-decade high of 6.1% in 2017-18: NSSO survey
 

NSSO सर्वे में खुलासा, 45 सालों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी 2017-18 में : रिपोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 January 2019, 11:29 IST

नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) का वह सर्वे आख़िरकार सामने आ गया है, जिससे केंद्र सरकार घबरा गई थी. बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार NSSO की पीरियाडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस)  रिपोर्ट बताती है कि देश में बेरोजगारी की दर साल 2017-18 में 45 सालों में सबसे ज्यादा 6.1 फीसदी पर पहुंच गई. इससे पहले इस रिपोर्ट को जारी न करने को लेकर नाराजगी जताते हुए राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एनएससी की मंजूरी के बावजूद रिपोर्ट को जारी नहीं किया. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार इस रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार 1972-73 के बाद से बेरोजगारी की दर अपने उच्चतम स्तर पर है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार शहरों में बेरोजगारी की दर ग्रामीण इलाकों की तुलना में ज्यादा है.

2017 -18 में ये रहा बेरोजगारी का हाल  

2017-18 के दौरान शहरों में बेरोजगारी दर जहां 7.8 फीसदी रही वहीं ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर 5.3 फीसदी रही. रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 में ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष बेरोजगारी दर 17.4 फीसदी तक पहुंच गई जबकि इस दौरान महिला बेरोजगारी दर ग्रामीण क्षेत्रों में 13.6 फीसदी रही. जबकि 2011-12 में यह बेरोजगारी दर 5.0 और 4.8 फी सदी था. शहरी इलाकों की बात करें तो 2017-18 में बेरोजगारी दर 18.7 (पुरुष) और 27.2 (महिला) रही.

वर्ष 2017-18 के रोजगार और बेरोजगारी पर एनएसएसओ (नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन) के पहले वार्षिक सर्वेक्षण को रोकने के खिलाफ राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के कार्यवाहक अध्यक्ष ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया था. जबकि उनके एक अन्य सहयोगी ने भी पद छोड़ दिया था.

दावा किया गया है कि इस सर्वे में नोटबंदी के बाद नौरियों में नुकसान होने की बात सामने आयी थी. एनएससी 2006 में गठित एक स्वायत्त संस्था है और देश की सांख्यिकीय प्रणालियों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा करने का काम करता है. पी सी. मोहनन और जे. वी. मीनाक्षी (दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर) को सरकार द्वारा जून 2017 में एनएससी में सदस्य के रूप में नियुक्त किया था. दोनों का तीन साल का कार्यकाल था. मोहनन इस्तीफा देने से पहले कार्यवाहक अध्यक्ष थे. इन इस्तीफों के बाद NSC के पदेन सदस्य अमिताभ कांत जो संस्था में शेष बचे हैं.

First published: 31 January 2019, 11:10 IST
 
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