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लॉकडाउन के दौरान बढ़ी बेरोजगारी, एक्सपर्ट का अनुमान- दो हफ्तों में 5 करोड़ ने गंवाया ने रोजगार

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 April 2020, 9:26 IST

कोरोना वायरस (coronavirus) ने दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर विनाशकारी आसार डाला है. लॉकडाउन के दौरान शहरी बेरोजगारी दर 30.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है जबकि कुल बेरोजगारी दर 23.4 पहुंच गई है. यह आंकड़े सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMEI) के साप्ताहिक ट्रैकर सर्वे के अनुसार है. 5 अप्रैल को समाप्त सप्ताह का नवीनतम डेटा सोमवार शाम को जारी किया गया. मार्च के मध्य में बेरोजगारी पर CMIE का अनुमान कहता है कि बेरोजगारी 8.4 फीसदी से बढ़कर वर्तमान में 23 फीसदी पर पहुंच गई.

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् प्रणब सेन का कहना है कि मोटे तौर देखा जाये तो लॉकडाउन के केवल दो हफ्तों में लगभग 5 करोड़ लोगों ने नौकरी खो दी हैं. उन्होंने कहा बेरोजगारी का वास्तविक दायरा अभी और बढ़ सकता है, जो आने वाले वक्त में दिखाई देगा. हालांकि भारत में नौकरियों पर कोई विश्वसनीय आधिकारिक हाई फ्रीक्वेंसी डेटा नहीं है. सीएमआईई के आंकड़ों पर भी पहले सवाल उठते रह हैं.


भारत ही नहीं अन्य देशों ने भी इस महामारी का अर्थव्यवस्था पर असर दिखा है. उदाहरण के लिए पिछले दो हफ्तों में लगभग 1 करोड़ अमेरिकी श्रमिकों ने बेरोजगारी के दावे किए हैं. लॉकडाउन हटाए जाने के बाद क्या होगा इस पर कुछ जानकर कहते हैं कि बेरोजगारी तब भी जारी रह सकती है.

एक रिपोर्ट के अनुसार सीएमआईई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेश व्यास ने कहा कि चूंकि दो साप्ताहिक सर्वेक्षणों ने बेरोजगारी के लगभग समान स्तर (लगभग 23%) का संकेत दिया है, इसलिए यह संख्या विश्वसनीय है. यह एक बहुत बड़ी बढ़ोतरी है." हमने यह उम्मीद नहीं की थी कि यह इतना ज्यादा होगा. यूबीएस के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर मई के मध्य तक स्थिति सामान्य हो जाती है, तो नुकसान सीमित होगा और वित्त वर्ष 2021 के लिए जीडीपी ग्रोथ 4 प्रतिशत होगी."

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First published: 8 April 2020, 9:13 IST
 
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