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जब इंदिरा गांधी ने टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने से कर दिया था इनकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 July 2019, 9:19 IST

इंदिरा गांधी के बाद देश की कोई महिला वित्त मंत्री बजट पेश करेंगी. 1970 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक वर्ष के लिए वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया था. उन्होंने वर्ष 1970-71 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया. देखने वाली बात यह होगी कि क्या निर्मला सीतारमन भी इंदिरा की राह पर चलेंगी या नहीं. इंदिरा के बजट की जिस बात को लेकर आलोचना हुई वह यह थी कि उन्होंने कर छूट की सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया.

अपने बजट भाषण में इंदिरा ने कहा था कि वह सिगरेट पीने वालों की जेब पर भर डालने जा रही हैं. उन्होंने सिगरेट पर टैक्स 3 से बढ़ाकर 22 फीसदी कर दिया. इससे सरकार को 13.50 करोड़ रुपए राजस्व मिला. अपने भाषण में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें समय-समय पर छूट की सीमा बढ़ाने के लिए सुझाव दिया गया था ताकि निचले आय वर्ग के लोगों को राहत मिले.

 

गांधी ने यह भी स्वीकार किया था कि कराधान से आयकर अधिकारी अधिक समय बड़े मामलों को निपटाने में सक्षम होंगे. समय-समय पर सुझाव दिए गए कि आयकर की छूट की सीमा को कम आय समूहों को राहत देने और बेहतर कर प्रशासन के हित में एक उपाय के रूप में उठाया जाना चाहिए.

हालांकि उन्होंने कहा कि 4,000 रुपये से 4,800 रुपये तक की छूट को अनुचित रूप से कम नहीं माना जा सकता है. हमारे जैसे गरीब देश में वर्तमान छूट सीमा जो कि आश्रितों की संख्या के अनुसार 4,000 रुपये से 4,800 रुपये तक होती है, को देश में आय के औसत स्तर के संबंध में अनुचित रूप से कम नहीं माना जा सकता है. यह ध्यान में रखते हुए कि इस तरह के कदम से आयकर अधिकारियों का काम आसान हो जाएगा.

नवनियुक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को केंद्रीय बजट पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. यह देखा जाना बाकी है कि क्या वह गांधी की राह पर चलेंगी या अपने हाल के पूर्ववर्तियों के नक्शेकदम पर चलेंगी.

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First published: 5 July 2019, 9:19 IST
 
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